Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सालेभाट में तैयार किए गए 50 हजार सीड बॉल

    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Vikas Manthan
    Subscribe
    • आज की बात
    • देश
    • विदेश
      • अमेरिका
      • चीन
      • पाकिस्तान
      • ब्रिटेन
      • रूस
      • श्रीलंका
    • राज्य
      • छत्तीसगढ़
      • उत्तर प्रदेश
      • झारखंड
      • नई दिल्ली
      • बिहार
      • मध्यप्रदेश
      • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
      • गरियाबंद
      • दंतेवाड़ा
      • दुर्ग
      • बालोद
      • बिलासपुर
      • बीजापुर
    • मंथन
      • कृषि मंथन
      • जल मंथन
      • श्रम मंथन
      • स्वराज मंथन
      • नवचार मंथन
      • स्वास्थ्य मंथन
      • भू मंथन
      • बाल मंथन
      • जिनकी बात उनकी ज़बानी
      • खेल
    • महिला सशक्तिकरण
    • सर्वेक्षण
    • लाइफ़स्टाइल
      • Music
      • Fashion
      • Fitness
    Vikas Manthan
    You are at:Home»आज की बात»ग्राम कुसुमकसा की महिलाएं: संगठित व्यापार से आत्मनिर्भरता की ओर एक साहसिक कदम
    आज की बात

    ग्राम कुसुमकसा की महिलाएं: संगठित व्यापार से आत्मनिर्भरता की ओर एक साहसिक कदम

    vikasBy vikasJuly 31, 2025Updated:August 27, 2025No Comments3 Mins Read9 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Email Reddit
    Forest Based Livelihoods
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp Email

    1. पृष्ठभूमि और संदर्भ

    ग्राम कुसुमकसा, विकासखंड अंबागढ़ चौकी, छत्तीसगढ़ का एक आदिवासी बहुल गांव है। यह इलाका जैव विविधता से समृद्ध है, जहां की महिलाएं वर्षों से ईमली, महुआ, बेर, हर्र, बहेरा जैसे लघु वनोपजों का संग्रहण करके आजीविका चलाती रही हैं। लेकिन पारंपरिक तरीकों में बिचौलियों की भूमिका, मूल्य निर्धारण में अनभिज्ञता और बाज़ार से दूरी के कारण ये महिलाएं आर्थिक रूप से पिछड़ी रह जाती थीं।

    2. बदलाव की शुरुआत: ग्राम सभा से उठी उम्मीद की लौ

    मार्च 2024 में एक ग्राम सभा का आयोजन हुआ, जिसमें महिला समूहों के साथ पंचायत प्रतिनिधि, वन विभाग अधिकारी और बिहान मिशन की टीम ने भाग लिया। इस चर्चा में पहली बार यह विचार सामने आया कि यदि महिलाएं मिलकर संगठित रूप से संग्रहण और विपणन करें, तो वे सीधे बाजार से जुड़कर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकती हैं। यह बैठक महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

    3. प्रशिक्षण और सामूहिक पहल की तैयारी

    ग्राम सभा के बाद महिला स्व-सहायता समूहों के साथ विशेष बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में उन्हें संगठित खरीद-विक्रय, मूल्य निर्धारण, मुनाफा गणना और स्थानीय व्यापारियों से सीधा संपर्क स्थापित करने की रणनीति सिखाई गई। महिलाओं ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने समूहों को आर्थिक गतिविधियों के लिए तैयार करना शुरू किया।

    4. महिला उत्पादक समूह का गठन

    अप्रैल 2024 में तीन सक्रिय महिला स्व-सहायता समूहों की सहभागिता से ‘महिला उत्पादक समूह’ का गठन हुआ। पहले ये महिलाएं महज़ घरेलू कामकाज और छोटी मजदूरी (₹40/माह) तक सीमित थीं। लेकिन अब उन्होंने संगठित व्यापार की दिशा में कदम बढ़ाया। ग्राम के सरपंच, व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से स्थानीय उपज की खरीद के लिए ठोस संपर्क बनाए गए।

    5. व्यापार की शुरुआत और शुरुआती चुनौतियां

    अप्रैल 2025 से महिला समूहों ने ग्राम चौक पर सप्ताह में एक बार खरीदी दुकान लगाना शुरू किया, जहाँ गांव की महिलाएं ईमली, महुआ, बेर जैसे उपज बेचने लगीं। यह व्यापारिक पहल धीरे-धीरे गति पकड़ रही थी, लेकिन इस बीच स्थानीय कोचियों (बिचौलियों) ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने महिलाओं पर दबाव बनाकर खरीद-बिक्री रोकने की कोशिश की।

    6. पंचायत और ग्राम सभा की निर्णायक भूमिका

    महिलाओं ने धैर्य और रणनीति से काम लिया। उन्होंने ग्राम सभा में औपचारिक प्रस्ताव लाकर पंचायत से मदद मांगी। पंचायत ने गांव के हित में निर्णय लेते हुए यह घोषणा की कि कोचिए गांव में दुकान नहीं लगाएंगे, और महिला समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह पंचायत का ऐतिहासिक निर्णय था जिसने महिला समूहों को सुरक्षित और सम्मानित व्यापारिक स्थान दिलाया।

    7. व्यापारिक उपलब्धियां और आर्थिक परिणाम

    महिला उत्पादक समूह ने अब तक (जून 2025 तक) निम्नलिखित खरीद-बिक्री की:

    • ईमली – 8 क्विंटल
    • बेर – 6 क्विंटल
    • महुआ – 1 क्विंटल

    कुल व्यापार: ₹61,600/-
    यह प्रयास ग्राम हिमाभरण परियोजना के अंतर्गत प्रोत्साहन के रूप में भी मान्यता प्राप्त कर चुका है। इससे महिलाओं को न केवल आजीविका में मजबूती मिली, बल्कि उन्होंने संगठित निर्णय लेने और नेतृत्व कौशल भी अर्जित किया।

    8. सीख और संभावनाएँ

    ग्राम कुसुमकसा की यह कहानी दिखाती है कि जब महिलाओं को सही जानकारी, सहयोग और मंच मिलता है, तो वे स्थानीय संसाधनों के सहारे आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम उठा सकती हैं। महिला उत्पादक समूह का यह मॉडल अन्य गांवों में भी प्रतिरेपण (Replication) योग्य है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नारी शक्ति की निर्णायक भूमिका और अधिक सशक्त हो सके।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit WhatsApp Telegram Email
    Previous Articleग्राम सेवा कार्यक्रम: गया जिले में समग्र ग्रामीण विकास की दिशा में एक अभिनव पहल
    Next Article वन यात्रा: खमढोड़गी गांव की सामुदायिक ताकत से आजीविका विकास की मिसाल
    vikas
    • Website

    Related Posts

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    June 8, 2026

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सालेभाट में तैयार किए गए 50 हजार सीड बॉल

    June 7, 2026

    जिला बरगड़, ओडिशा में गरीबी की स्थिति: विस्तृत रिपोर्ट

    November 24, 2024
    Leave A Reply Cancel Reply

    Demo
    Top Posts

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025236 Views

    शिवनाथ नदी और उसकी ऐतिहासिक महत्ता:

    February 11, 202540 Views

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    March 8, 202624 Views

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण परिवर्तन की नई कहानी: विकास की धुरी बनी महिलाएँ

    March 8, 202618 Views
    Don't Miss
    Uncategorized July 11, 2026

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    रायपुर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम छत्तीसगढ़ी वीर सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह ने अपने…

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सालेभाट में तैयार किए गए 50 हजार सीड बॉल

    बड़ेगौरी बना जल प्रबंधन का आदर्श मॉडल

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    Demo
    About Us
    About Us

    Disclaimer: विकास मंथन, विकास समुदाय के लिए स्वतंत्र मीडिया प्लैटफॉर्म है।

    हम यह विश्वास करते है कि निरंतर संवाद एवं संवाद में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है, इस क्रम यह प्लैटफॉर्म समस्त वर्गो को यह अवसर प्रदाय करता है कि वे अपनी बात रखे तथा दूसरे की बात से अपनी समझ बनाये। सशक्त समाज निर्माण एवं स्थायी विकास प्राप्त करने के लिये पूर्व के अनुभवों, एक दूसरे के अनुभवों, चुनौतियों एवं नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस लिहाज से यह प्लैटफॉर्म विभिन्न विचारों, बेहतर सफलताओं, कठिन समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों को साझा करने का समान अवसर प्रदाय करता है।

    हम लोगो द्वारा लोगो के लिये लिखे गए सबसे नए विचारों, अनुभवों और अंतरदृष्टि को प्रकाशित करते हैं। हमारा काम वस्तूओं को सरल और प्रासंगिक बनाना है ताकि जो लोग अपने काम कर रहे, उनके काम को और बेहतर तरीके से किया जा सके और उसे आगे बढ़ाया जा सके।

    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
    Our Picks

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सालेभाट में तैयार किए गए 50 हजार सीड बॉल

    Most Popular

    महिलाओं के नेतृत्व में ‘हरित ग्राम’ का निर्माण

    July 15, 20240 Views

    स्वास्थ्य शिबिर का आयोजन

    July 25, 20240 Views

    धान की उन्नत खेती

    July 26, 20240 Views
    © 2026 Vikas Manthan. Designed by Sharp Web Technology.
    • Home
    • Lifestyle
    • Celebrities
    • Travel
    • Buy Now

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.