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    सर्वेक्षण

    ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के कार्यान्वयन हेतु केंद्रीय बजट 2026–27 में अवसर, अंतराल एवं अनुशंसाएँ

    vikasBy vikasFebruary 14, 2026Updated:February 19, 2026No Comments5 Mins Read4 Views
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    पृष्ठभूमि

    ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2026 में स्रोत पर कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, लैंडफिल सुधार, विकेन्द्रीकृत जैविक अपशिष्ट प्रबंधन, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR), तथा सुदृढ़ निगरानी एवं रिपोर्टिंग प्रणाली जैसे प्रावधानों को अधिक सख्ती से लागू करने का प्रावधान किया गया है। यद्यपि केंद्रीय बजट 2026–27 में एसडब्ल्यूएम के लिए कोई पृथक योजना घोषित नहीं की गई है, फिर भी यह एक व्यापक वित्तीय एवं नीतिगत ढाँचा प्रस्तुत करता है जो एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है। यह टिप्पणी बजट में उपलब्ध अवसरों, विद्यमान अंतरालों तथा आवश्यक नीतिगत अनुशंसाओं का विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

    केंद्रीय बजट 2026–27 में उपलब्ध अवसर

    विस्तारित सार्वजनिक पूंजीगत व्यय

    सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना की कमी को दूर करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। राज्य एवं शहरी स्थानीय निकाय (ULB) इस वित्तीय विस्तार का उपयोग सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्र (MRF), कम्पोस्टिंग एवं बायोमीथनेशन संयंत्र, वेस्ट-टू-एनर्जी इकाइयाँ, वैज्ञानिक लैंडफिल तथा पुराने डंपसाइट के पुनर्विकास के लिए कर सकते हैं। यह निवेश एसडब्ल्यूएम नियम 2026 में निर्धारित प्रसंस्करण क्षमता और वैज्ञानिक निपटान संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप है।


    शहरी स्थानीय निकायों को सुदृढ़ वित्तीय समर्थन

    वित्त आयोग के अंतरण एवं शहरी विकास आवंटन में वृद्धि से नगर निकायों की वित्तीय क्षमता सुदृढ़ होती है। इससे घर-घर कचरा संग्रहण प्रणाली का विस्तार, स्रोत पर पृथक्करण का प्रवर्तन, प्रसंस्करण इकाइयों के संचालन एवं रखरखाव (O&M) का वित्तपोषण तथा निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के अवसर उपलब्ध होते हैं। चूँकि एसडब्ल्यूएम नियम 2026 शहरी निकायों को स्पष्ट उत्तरदायित्व प्रदान करते हैं, यह वित्तीय सुदृढ़ीकरण अनुपालन क्षमता को बढ़ाता है।


    जैव-ऊर्जा एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन

    बजट में जैव-ऊर्जा और बायोगैस संबंधी प्रोत्साहनों से जैविक अपशिष्ट के विकेन्द्रीकृत प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है। इससे गोबरधन योजना के अंतर्गत बायो-सीएनजी संयंत्रों का विस्तार, ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जैविक अपशिष्ट का उपयोग, तथा मीथेन उत्सर्जन में कमी संभव है। यह एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के अंतर्गत अनिवार्य जैविक अपशिष्ट प्रसंस्करण प्रावधानों को सुदृढ़ करता है और परिपत्र अर्थव्यवस्था की दिशा में संक्रमण को प्रोत्साहित करता है।


    जलवायु-संबंधी निवेश एवं डीकार्बोनाइजेशन

    कार्बन कैप्चर एवं स्वच्छ ऊर्जा निर्माण में निवेश अप्रत्यक्ष रूप से अपशिष्ट क्षेत्र को समर्थन प्रदान करता है। वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों, लैंडफिल गैस कैप्चर प्रणाली तथा कचरा संग्रहण वाहनों के विद्युतीकरण को राष्ट्रीय डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों से जोड़ा जा सकता है। इससे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को जलवायु वित्त और मीथेन शमन कार्यक्रमों से संसाधन प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।


    पुनर्चक्रण पारितंत्र को सुदृढ़ करना

    महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण एवं विनिर्माण को प्रोत्साहन से उच्च-मूल्य पुनर्चक्रण, विशेषकर ई-कचरा प्रबंधन को बल मिलता है। इससे संसाधन पुनर्प्राप्ति श्रृंखला मजबूत होगी और एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के तहत पुनर्चक्रण लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।


    बजट समर्थन में अंतराल

    समर्पित एसडब्ल्यूएम कार्यान्वयन कोष का अभाव

    बजट में एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के कार्यान्वयन हेतु पृथक या रिंग-फेंस्ड आवंटन नहीं है। इसके अभाव में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को अन्य शहरी प्राथमिकताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है।


    संचालन एवं रखरखाव पर सीमित ध्यान

    हालाँकि पूंजीगत निवेश पर बल दिया गया है, परंतु दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव वित्तपोषण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई देती। सतत सेवा वितरण के लिए O&M के स्थायी वित्तीय स्रोत आवश्यक हैं; अन्यथा अवसंरचना का उपयोग प्रभावी रूप से नहीं हो पाएगा।


    नियामक एवं निगरानी सुदृढ़ीकरण की कमी

    एसडब्ल्यूएम नियम 2026 के प्रभावी अनुपालन के लिए वास्तविक समय डेटा प्रणाली, अनुपालन ऑडिट, तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की क्षमता वृद्धि आवश्यक है। बजट में इन नियामक आवश्यकताओं के लिए स्पष्ट संसाधन आवंटन का अभाव है।


    ग्रामीण संस्थागत चुनौतियाँ

    यद्यपि जैव-ऊर्जा प्रोत्साहन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सकारात्मक है, परंतु ग्राम पंचायतों में तकनीकी विशेषज्ञता, क्लस्टर आधारित अवसंरचना तथा अपशिष्ट एकत्रीकरण प्रणाली की कमी अभी भी एक प्रमुख बाधा है।


    अभिसरण एवं शासन संबंधी चुनौतियाँ

    एसडब्ल्यूएम नियम 2026 का कार्यान्वयन विभिन्न मंत्रालयों—शहरी विकास, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, ऊर्जा और उद्योग—के बीच समन्वय पर निर्भर करता है। बजट में स्पष्ट अभिसरण ढाँचे का उल्लेख नहीं है, जिससे कार्यान्वयन में विखंडन की संभावना बनी रहती है।


    अनुशंसाएँ

    पूंजीगत योजनाओं में एसडब्ल्यूएम का स्पष्ट आवंटन

    राज्यों को पूंजीगत व्यय योजनाओं में एसडब्ल्यूएम अवसंरचना हेतु निश्चित प्रतिशत आरक्षित करना चाहिए, विशेषकर प्रसंस्करण क्षमता विस्तार और डंपसाइट सुधार के लिए।


    अनुपालन-आधारित वित्तपोषण तंत्र

    ऐसा वित्तीय ढाँचा विकसित किया जाए जो पृथक्करण दर, प्रसंस्करण प्रतिशत और लैंडफिल सुधार जैसे मापनीय लक्ष्यों से जुड़ा हो।


    संचालन एवं रखरखाव के लिए सतत मॉडल

    उपयोगकर्ता शुल्क सुधार, प्रदर्शन-आधारित अनुदान तथा व्यवहार्यता अंतर अनुदान (Viability Gap Funding) जैसे उपायों को अपनाया जाना चाहिए ताकि सेवाएँ दीर्घकाल तक टिकाऊ रहें।


    डिजिटल निगरानी एवं क्षमता निर्माण

    कचरा डेटा प्रबंधन प्रणाली, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, अनुपालन डैशबोर्ड तथा नियामक संस्थाओं के क्षमता निर्माण के लिए विशेष संसाधन आवंटित किए जाएँ।


    जलवायु वित्त के साथ एकीकरण

    मीथेन शमन, कार्बन बाजार और मिश्रित वित्त (Blended Finance) के माध्यम से एसडब्ल्यूएम परियोजनाओं को जलवायु कार्रवाई से जोड़ा जाए।


    ग्रामीण क्लस्टर मॉडल को बढ़ावा

    ग्राम पंचायत स्तर पर क्लस्टर आधारित प्रसंस्करण, तकनीकी सहायता इकाइयाँ और जैव-सीएनजी मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाए।


    निष्कर्ष

    केंद्रीय बजट 2026–27 ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत वित्तीय एवं पर्यावरणीय आधार प्रदान करता है। विस्तारित पूंजीगत व्यय, स्थानीय निकायों को बढ़ा हुआ वित्तीय समर्थन, जैव-ऊर्जा प्रोत्साहन और जलवायु-संबंधी निवेश महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं।

    फिर भी, समर्पित निधि के अभाव, संचालन एवं रखरखाव की सीमित व्यवस्था तथा नियामक सुदृढ़ीकरण की कमी जैसे अंतराल बने हुए हैं। प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और नगर निकायों को लक्षित वित्तीय आवंटन, अभिसरण तंत्र, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और जवाबदेही आधारित वित्तीय मॉडल अपनाने होंगे।

    सफलता केवल बजटीय प्रावधानों पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि रणनीतिक योजना, संस्थागत क्षमता और सुदृढ़ शासन तंत्र पर भी निर्भर करेगी।

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