बालोद जिले के डौंडी लोहारा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कुदारीदल्ली का आश्रित गाँव हुच्चेटोला जिला सीमा के अंतिम छोर पर स्थित है। चारों ओर घने जंगलों से घिरे इस गाँव में पहुँचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है। यहाँ कुल 68 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आबादी लगभग 478 है। गाँव में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और अपनी आजीविका मुख्यतः वन संसाधनों और कृषि पर निर्भर करते हैं।
“हमारे लिए जंगल सिर्फ पेड़ नहीं, हमारी पहचान और रोज़गार दोनों है।” — ग्रामसभा सदस्य
सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र की प्रक्रिया : अधिकार से आत्मविश्वास तक
गाँव में खोज संस्था के सहयोग से सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) की जानकारी दी गई। इसके तहत ग्रामसभा आयोजित कर एक वन अधिकार समिति का गठन किया गया। समिति ने दावा प्रक्रिया की पूरी जानकारी SDLC को भेजी और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार किए।
लगातार प्रयासों के बाद, जब 9 अगस्त 2023 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर डौंडी में आयोजित कार्यक्रम में ग्राम सभा को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र प्राप्त हुआ, तो यह दिन गाँव के इतिहास में मील का पत्थर बन गया।
“पहली बार लगा कि यह जंगल अब सच में हमारा है — और हम इसकी रक्षा करेंगे।” — महिला समिति सदस्य
ग्रामसभा द्वारा वनों का प्रबंधन : अपने नियम, अपनी जिम्मेदारी
अधिकार पत्र मिलने के बाद ग्रामसभा ने सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया और गाँव के लिए अपने स्थानीय नियम-कानून बनाए। समिति ने जंगल के संरक्षण और उपयोग की स्पष्ट योजना तैयार की।
बरसात से पहले गाँव ने मिलकर 600 पौधों की नर्सरी तैयार की और 8000 सीड बॉल्स बनाकर जंगल के खाली क्षेत्रों में बिखेरीं। साथ ही उपयुक्त स्थानों पर 600 पौधों का रोपण भी किया गया। यह सब ग्रामवासियों के सामूहिक श्रम और समर्पण से संभव हुआ।
विश्व आदिवासी दिवस : प्रशासन और गाँव के बीच संवाद का सेतु
ग्रामवासियों के सशक्त प्रयासों को देखते हुए 9 अगस्त 2024 को विश्व आदिवासी दिवस का मुख्य आयोजन हुच्चेटोला में ही किया गया। इसमें जिला प्रशासन के सभी अधिकारी उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने अपनी आवश्यकताओं और योजनाओं को साझा किया, जिन पर विभागों ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए विभागीय योजनाओं से जोड़कर सहायता देने का आश्वासन दिया।
विभागीय अभिसरण : योजनाओं से मिली नई दिशा
सामुदायिक अधिकार मिलने के बाद गाँव में कई विभागों के सहयोग से विकास की नई शुरुआत हुई —
आजीविका मिशन ने 15 महिलाओं को सिलाई व मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण प्रदान किया।
वन विभाग ने 11 युवाओं को बांस शिल्प प्रशिक्षण दिया, जिसके बाद अब गाँव में टेबल, कुर्सी और सजावटी सामान बनने लगे हैं।
पशुपालन विभाग ने 66 परिवारों को मुर्गी पालन और 2 परिवारों को बटेर पालन के लिए इकाइयाँ दीं।
कृषि विभाग ने 3 किसानों के खेतों में बोरवेल और पंप की सुविधा दी।
मत्स्य विभाग ने 5 परिवारों को मछली पालन हेतु जाल उपलब्ध कराए।
मनरेगा के तहत 3 नए कुओं का निर्माण कराया गया।
आदिवासी विकास विभाग ने समिति को ₹7544 की सहायता राशि दस्तावेजी कार्य हेतु दी।
इन प्रयासों से गाँव में विविध आजीविका स्रोत विकसित हुए हैं — सिलाई, बांस शिल्प, पशुपालन और कृषि के माध्यम से आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।
वन संसाधन आदर्श ग्राम की ओर : आत्मनिर्भरता की राह पर हुच्चेटोला
ग्रामवासियों ने समझ लिया है कि जंगल केवल उनका पर्यावरणीय आधार नहीं बल्कि आर्थिक आधार भी है। अब वे संसाधनों का संरक्षण करते हुए, योजनाओं से जुड़कर, अपने गाँव को आदर्श वन संसाधन ग्राम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
“जब जंगल हमारा है, तो जिम्मेदारी भी हमारी है — अब हम अपनी धरती और भविष्य दोनों की रक्षा करेंगे।”
आत्मनिर्भर भारत की जड़ें गाँवों में
हुच्चेटोला की कहानी यह संदेश देती है कि जब ग्रामीण समुदाय को अपने संसाधनों पर अधिकार मिलता है, तो वे न केवल प्रकृति का संरक्षण करते हैं, बल्कि रोज़गार, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग भी बनाते हैं। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार ने यहाँ विकास को नीचे से ऊपर तक बढ़ाने की दिशा में सशक्त कदम रखा है।