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    स्वराज मंथन

    चोरभट्टी की ग्राम सभा : संघर्ष, भागीदारी और उम्मीद की कहानी

    vikasBy vikasAugust 27, 2025Updated:August 27, 2025No Comments3 Mins Read15 Views
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    Gram Sabha
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    “जब लोग साथ आते हैं, तो गाँव की छोटी-सी बैठक भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाती है।”


    पृष्ठभूमि

    कवर्धा जिले के अंतर्गत आने वाली चोरभट्टी ग्राम पंचायत में 25 अगस्त 2025 को ग्राम सभा का आयोजन हुआ। यह कोई साधारण बैठक नहीं थी, बल्कि एक ऐसी सभा थी जहाँ गाँव वालों की आवाज़ें उनके भविष्य की दिशा तय कर रही थीं।

    गाँव में सूचना प्रसार की दिक्कत थी—क्योंकि जानकारी केवल फोन और मैसेज से दी गई थी। बहुत से लोग इससे अनजान रह गए। ऐसे समय पर समर्थ संस्था की टीम ने आगे आकर जिम्मेदारी उठाई।


    सहभागिता की शुरुआत

    “हमने तय किया कि कोई भी व्यक्ति ग्राम सभा से वंचित न रहे।” — समर्थ टीम सदस्य

    टीम ने लोगों को घर-घर जाकर बुलाया और जिनके पास साधन नहीं थे, उन्हें अपनी गाड़ी से सभा स्थल तक पहुँचाया। उनके प्रयासों से 688 मतदाताओं में से 42 लोग सभा में शामिल हो सके। इनमें 13 महिलाएँ और 7 युवा भी थे।


    मुद्दों की चर्चा

    सभा में सबसे पहला मुद्दा था गाँव में बढ़ता अतिक्रमण। बाहरी लोग पंचायत से अधिकार पत्र की मांग कर रहे थे। लेकिन एकमत न बनने पर यह प्रस्ताव रोक दिया गया।

    इसके बाद चर्चा हुई—

    • आवास योजनाओं की गड़बड़ियों पर
    • सामुदायिक शौचालय की ज़रूरत पर
    • बच्चों के आधार कार्ड न बनने की समस्या पर
    • नर्सरी पौधों की खरीदी और पौधारोपण पर
    • अधूरे आवास और राजस्व भूमि पर अतिक्रमण पर

    “आधार कार्ड न होने से बच्चों के सारे काम अटक जाते हैं।” — ग्रामवासी


    समर्थ संस्था की पहल

    सभा के बीच समर्थ संस्था को भी अपनी बात रखने का अवसर मिला। राम भैया ने संस्था का परिचय दिया और श्रम कार्ड योजना, आधार कार्ड की समस्या पर चर्चा की। सचिव ने ग्रामीणों से कहा—

    “अगर आप खेत की मेड़ों पर पौधे लगाना चाहते हैं, तो समर्थ संस्था इसमें आपकी मदद करेगी।” — पंचायत सचिव


    उम्मीद और आगे का रास्ता

    सभा के अंत में सचिव ने आश्वासन दिया कि समुदाय की सभी समस्याओं को नोट कर लिया गया है और उन पर आगे कार्यवाही होगी।

    भले ही तीजा पर्व के कारण महिलाएँ कम आई थीं, लेकिन जो लोग उपस्थित हुए उन्होंने पूरे मन से भागीदारी की। यह सभा इस बात का प्रतीक बनी कि गाँव की असली ताकत उसकी एकजुटता और सहभागिता में है।


    निष्कर्ष

    चोरभट्टी की ग्राम सभा की यह कहानी बताती है कि अगर समुदाय और संस्थाएँ मिलकर काम करें, तो छोटी-सी बैठक भी बड़े बदलाव की नींव रख सकती है।

    “हमारी समस्याएँ हमारी अपनी हैं, और समाधान भी हमें मिलकर ही निकालना होगा।” — ग्रामीण महिला प्रतिभागी

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