30 एकड़ फसलों में तबाही, चिंता में किसान
1. घटना की पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के लुंड्रा विकासखंड के गेरसा ग्राम पंचायत में शनिवार सुबह अचानक बड़ी घटना हुई। लगातार कई दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण बाँध का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा था। सुबह करीब नौ बजे बाँध के एक हिस्से में दरार पड़ी और कुछ ही देर में वह टूट गया।
2. किसानों पर असर
बाँध टूटते ही आसपास के खेतों में पानी भर गया। करीब 30 एकड़ क्षेत्र में लगी धान और सब्ज़ियों की फसलें पानी में डूब गईं। किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया।
“हमारा सब कुछ इसी फसल पर निर्भर था, अब समझ नहीं आ रहा कि घर कैसे चलेगा।” – एक स्थानीय किसान
3. गाँव में दहशत
तेज़ बहाव से पानी गाँव की ओर बढ़ा तो ग्रामीण घबराकर घरों से बाहर निकल आए। हालाँकि किसी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन लोग पूरी तरह सहमे हुए हैं। अचानक आई इस आपदा ने पूरे गाँव में डर और चिंता का माहौल पैदा कर दिया।
4. प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर मौके पर पहुँचे और निरीक्षण किया। एरिगेशन विभाग की टीम ने भी बाँध का जायज़ा लिया। अधिकारियों का कहना है कि पानी का स्तर कम होते ही मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।
“प्रशासन स्थिति पर पूरी नज़र रख रहा है और प्रभावित किसानों को हर संभव मदद दी जाएगी।” – जिला प्रशासन
5. बाँध का इतिहास
गेरसा बाँध का निर्माण सन् 1991–92 में हुआ था। यह बाँध पिछले तीन दशकों से किसानों की सिंचाई का प्रमुख साधन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाँध की समय-समय पर देखरेख नहीं हुई, जिसके कारण आज यह बड़ा हादसा हुआ।
6. भविष्य की चुनौतियाँ
इस घटना ने एक बार फिर से बाँधों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- किसानों की हानि की भरपाई के लिए राहत पैकेज और बीमा सहायता ज़रूरी है।
- पुराने बाँधों की नियमित तकनीकी जाँच और मरम्मत अनिवार्य होनी चाहिए।
- गाँव स्तर पर चेतावनी और अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए ताकि लोग समय रहते सुरक्षित हो सकें।
निष्कर्ष
गेरसा बाँध का टूटना किसानों के लिए एक बड़ा झटका है। भले ही जानमाल की हानि नहीं हुई, लेकिन खेती-बाड़ी और आजीविका पर इसका गहरा असर पड़ेगा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जल संसाधनों की सुरक्षा और रख-रखाव में किसी तरह की लापरवाही भविष्य में और भी बड़े संकट ला सकती है।
