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    जल मंथन

    धमतरी में बढ़ता जल संकट: 52% वन क्षेत्र और फिर भी पानी की किल्लत

    vikasBy vikasApril 21, 2025Updated:April 21, 2025No Comments3 Mins Read1 Views
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    धमतरी (छत्तीसगढ़):
    वनों से घिरा, नदियों से समृद्ध, और गंगरेल जैसे विशाल जलाशय वाला धमतरी जिला अब गंभीर पेयजल संकट की ओर बढ़ रहा है। जहां एक ओर जिले का 52% हिस्सा वनाच्छादित है और महानदी, सोंढूर और शिवनाथ जैसी नदियाँ बहती हैं, वहीं दूसरी ओर कई गांवों में पीने के पानी के लिए लोग लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं।

    भूजल की गिरती स्थिति

    केंद्रीय भूजल बोर्ड (Central Ground Water Board – CGWB) की 2023 की रिपोर्ट बताती है कि जिले के चार विकासखंडों में से कुरुद और मगरलोड अब “अर्ध-संकटग्रस्त” (semi-critical) श्रेणी में आ चुके हैं। इसका कारण है – भूजल का अत्यधिक दोहन, वर्षा जल का अपर्याप्त संचयन, और जल संसाधनों की असंवेदनशील योजना।

    बारिश होती है, लेकिन पानी बचता नहीं

    धमतरी में औसतन 1200 मिमी से अधिक वर्षा होती है, फिर भी पानी की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में असमान है। इसका कारण वर्षा जल का समुचित संग्रह न होना और पारंपरिक जल स्रोतों की उपेक्षा है।


    10 गांवों की स्थिति: एक चिंताजनक तस्वीर

    नीचे धमतरी जिले के 10 ग्रामों का जल स्रोत, उपलब्धता और समस्याओं का विवरण प्रस्तुत है:

    क्रमग्राम का नामजल स्रोत एवं संख्याजल उपलब्धताप्रमुख समस्याएँ
    1पिपराहीभारी1 तालाब, 2 हैंडपंपसीमितगर्मियों में सूखा; महिलाएं दूर से पानी लाती हैं।
    2नवागांव3 ट्यूबवेल, 4 हैंडपंपमध्यमभूजल गिरावट; कुछ हैंडपंप खराब।
    3परास्तराई1 ओवरहेड टैंक, 2 ट्यूबवेल, 1 पाइपलाइनअस्थिरपाइपलाइन लीकेज; टैंक सफाई नहीं।
    4सेहरादाबरी2 ट्यूबवेल, 1 वर्षा जल संचयन यूनिटसीमितसंचयन अधूरा; जल स्तर गिरा।
    5खपरी1 ट्यूबवेल, 3 हैंडपंपकमहैंडपंप सूखे; पानी की मात्रा कम।
    6भानपुरी2 ट्यूबवेल, 1 पाइपलाइनमध्यमपाइपलाइन आपूर्ति अनियमित।
    7पोटियाडीह2 ट्यूबवेल, 2 हैंडपंपसीमितगर्मियों में कमी; स्रोत कम।
    8रत्नाबंधा3 ट्यूबवेल, 1 वर्षा संचयन प्रणालीअस्थिरसंचयन निष्क्रिय; जल स्तर गिरा।
    9संबलपुर2 ट्यूबवेल, 2 हैंडपंपकमहैंडपंप खराब; जल स्रोत निर्भरता अधिक।
    10टेलिनसत्ती3 ट्यूबवेल, 1 पाइपलाइनसीमितपाइपलाइन लीकेज; ट्यूबवेल गहराई कम।

    विश्लेषण और विशेषज्ञों की राय

    जल विशेषज्ञ मानते हैं कि “धमतरी में जल संकट का कारण केवल जल की कमी नहीं, बल्कि जल प्रबंधन की कमी है।” परंपरागत जल स्रोत जैसे तालाब, कुएं और वर्षा जल संचयन प्रणाली का संरक्षण आवश्यक है।

    NGO से जुड़े एक कार्यकर्ता का कहना है:

    “हमारे सर्वेक्षण में यह साफ हुआ कि जिन गांवों में वर्षा जल संचयन और सामुदायिक टैंक जैसी पहल हुई, वहां जल संकट अपेक्षाकृत कम है। आवश्यकता है सामुदायिक सहभागिता और नीति-आधारित समाधान की।”


    समाधान की दिशा में कदम

    1. ग्राम स्तर पर जल सुरक्षा योजना बनाना।
    2. सभी पंचायतों में जल स्रोतों की मैपिंग और मरम्मत।
    3. वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करना, विशेषकर स्कूलों और आंगनबाड़ी भवनों में।
    4. नल-जल योजना को क्रियाशील और नियमित मॉनिटरिंग के साथ लागू करना।

    निष्कर्ष:

    धमतरी जैसे वन क्षेत्र और जल संपन्न जिले में भी जल संकट एक सचेत करने वाली स्थिति है। यह केवल प्राकृतिक संसाधनों की समस्या नहीं, बल्कि नीतिगत शिथिलता और सामुदायिक भागीदारी की कमी को भी दर्शाता है। समय रहते योजना बनाई गई, तो धमतरी फिर से जल सुरक्षा का उदाहरण बन सकता है।

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