Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Vikas Manthan
    Subscribe
    • आज की बात
    • देश
    • विदेश
      • अमेरिका
      • चीन
      • पाकिस्तान
      • ब्रिटेन
      • रूस
      • श्रीलंका
    • राज्य
      • छत्तीसगढ़
      • उत्तर प्रदेश
      • झारखंड
      • नई दिल्ली
      • बिहार
      • मध्यप्रदेश
      • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
      • गरियाबंद
      • दंतेवाड़ा
      • दुर्ग
      • बालोद
      • बिलासपुर
      • बीजापुर
    • मंथन
      • कृषि मंथन
      • जल मंथन
      • श्रम मंथन
      • स्वराज मंथन
      • नवचार मंथन
      • स्वास्थ्य मंथन
      • भू मंथन
      • बाल मंथन
      • जिनकी बात उनकी ज़बानी
      • खेल
    • महिला सशक्तिकरण
    • सर्वेक्षण
    • लाइफ़स्टाइल
      • फिल्में
      • Music
      • Fashion
      • Fitness
    Vikas Manthan
    You are at:Home»जल मंथन»चिनार नदी की सूखती साँसे: एक नदी, एक चेतावनी
    जल मंथन

    चिनार नदी की सूखती साँसे: एक नदी, एक चेतावनी

    vikasBy vikasMay 18, 2025No Comments4 Mins Read1 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Email Reddit
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp Email

    “नदियां सिर्फ जल की धाराएं नहीं, बल्कि संस्कृति, कृषि और जीवन की आधारशिला होती हैं। जब कोई नदी सूखती है, तो उसका मतलब होता है – जीवन की एक धारा रुक जाना।”

    छत्तीसगढ़ के कई अंचलों में फैली चिनार नदी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कभी गांवों के बीच से बहती यह नदी जीवनदायिनी थी, लेकिन आज वह केवल एक सूखी रेत की पट्टी बनकर रह गई है। रेत के टीलों और ट्रैक्टरों के निशान इस बात की गवाही देते हैं कि हम किस हद तक प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर चुके हैं।

    आज चिनार नदी की हालत देखकर जल संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गई है।


    चिनार नदी: जीवन और जल का स्रोत

    चिनार नदी छत्तीसगढ़ के रायपुर, बलौदाबाजार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से होकर बहती है। यह नदी वर्षों से स्थानीय लोगों के लिए सिंचाई, पेयजल और दैनिक जरूरतों का प्रमुख स्रोत रही है। ग्रामीणों की धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक रीति-रिवाजों में भी इसका विशिष्ट स्थान है।


    संकट के कारण:

    1. वर्षा में गिरावट

    • भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2010 से 2023 के बीच औसतन 11% वर्षा में कमी आई है।
    • चिनार नदी के जलग्रहण क्षेत्र में 2021 और 2022 में 15% कम बारिश रिकॉर्ड की गई।

    2. भूजल स्तर में गिरावट

    • CGWB की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, चिनार नदी क्षेत्र में भूजल स्तर हर साल लगभग 2.5 मीटर घट रहा है।
    • कई गांवों में अप्रैल-मई के महीनों में ही हैंडपंप और कुएं सूखने लगते हैं।

    3. अवैध रेत खनन

    • NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में चिनार नदी क्षेत्र में 27 से अधिक स्थलों पर अवैध रेत खनन की पुष्टि हुई थी।
    • रेत खनन से नदी की गहराई और बहाव दोनों प्रभावित हुए हैं।

    4. वृक्षों की कटाई और तटों का अतिक्रमण

    • फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में 2019 से 2023 तक 3.13% की गिरावट आई है।
    • चिनार नदी के किनारों पर अवैध प्लॉटिंग, निर्माण और खेती बढ़ रही है, जिससे वर्षा जल का प्रवाह बाधित होता है।

    ग्रामीण जीवन पर असर

    कृषि संकट

    • पहले जहां चिनार नदी से लगभग 1,200 हेक्टेयर भूमि सिंचित होती थी, अब वहां बंजर जमीन नजर आती है।
    • बोरवेल और टैंकर के सहारे खेती करना किसानों की लागत को 30–40% तक बढ़ा रहा है।

    पेयजल की समस्या

    • गर्मियों में 18 गांवों में टैंकर से पानी पहुंचाना पड़ता है (जनपद पंचायत रिपोर्ट 2023)।
    • जल की गुणवत्ता भी गिर रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।

    महिलाएं और बच्चे प्रभावित

    • पानी लाने के लिए महिलाओं को रोजाना 3–5 किलोमीटर तक चलना पड़ता है।
    • बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है क्योंकि वे भी पानी की व्यवस्था में जुट जाते हैं।

    ग्रामीणों की आवाज़

    रामकुमार साहू (ग्राम चरौदा):

    “जब हम छोटे थे, चिनार नदी सालभर बहती थी। अब सिर्फ रेत बची है। पानी ढूंढ़ना कठिन हो गया है।”

    रेखा यादव, महिला स्वयं सहायता समूह सदस्य:

    “अगर पानी नहीं मिला तो खेती बंद करनी पड़ेगी। अब हर साल पानी के लिए लड़ना पड़ता है।”


    समाधान: अब भी देर नहीं हुई

    वर्षा जल संचयन को बढ़ावा

    • स्कूलों, पंचायत भवनों और घरों में वर्षा जल संचयन की संरचनाएं बनें।
    • “नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी” योजना के तहत नालों का संरक्षण हो।

    भूजल पुनर्भरण के उपाय

    • MGNREGS के माध्यम से रिचार्ज कुएं, चेक डैम, तालाब गहरीकरण जैसे काम करवाए जाएं।

    अवैध रेत खनन पर रोक

    • जिला खनिज विभाग और प्रशासन की निगरानी से NGT आदेशों का पालन करवाया जाए।

    नदी पुनर्जीवन अभियान

    • महाराष्ट्र के हिवरे बाजार मॉडल को अपनाकर समुदाय आधारित नदी बचाओ अभियान शुरू हो।
    • गांवों में “नदी मित्र समूह” बनाकर युवाओं और महिलाओं को जोड़ा जाए।

    निष्कर्ष

    चिनार नदी का सूखना एक चेतावनी है – न केवल इस नदी के लिए, बल्कि उन सैकड़ों छोटी नदियों के लिए जो इसी हालात से गुजर रही हैं। यह संकट केवल एक पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संकट है।

    अब वक्त है कि हम जल संरक्षण को केवल नारा नहीं, एक जन आंदोलन बनाएं।

    क्योंकि #जल_है_तो_कल_है।
    और अगर नदी बचेगी, तो जीवन बचेगा।


    स्रोत:

    1. भारतीय मौसम विभाग (IMD) – छत्तीसगढ़ वर्षा रिपोर्ट 2023
    2. केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) रिपोर्ट – 2022
    3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) आदेश – 2021
    4. फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट – 2023
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit WhatsApp Telegram Email
    Previous Articleधमतरी में बढ़ता जल संकट: 52% वन क्षेत्र और फिर भी पानी की किल्लत
    Next Article वन का हक, समुदाय का संघर्ष: कोयाइटपाल की मिसाल
    vikas
    • Website

    Related Posts

    तेज बहाव से टूटा गेरसा बाँध

    September 6, 2025

    कांकेर जिले के पाढ़रगांव में हर घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल

    August 22, 2025

    धमतरी में बढ़ता जल संकट: 52% वन क्षेत्र और फिर भी पानी की किल्लत

    April 21, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    Demo
    Top Posts

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025235 Views

    शिवनाथ नदी और उसकी ऐतिहासिक महत्ता:

    February 11, 202521 Views

    चोरभट्टी की ग्राम सभा : संघर्ष, भागीदारी और उम्मीद की कहानी

    August 27, 202515 Views

    कांकेर जिले के पाढ़रगांव में हर घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल

    August 22, 202512 Views
    Don't Miss
    स्वास्थ्य मंथन January 4, 2026

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    जैविक कीट प्रबंधन और पोषण वाटिका से बदलती ग्रामीण खेती सुबह की थाली में परोसी…

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    तेज बहाव से टूटा गेरसा बाँध

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    Demo
    About Us
    About Us
    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
    Our Picks

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    Most Popular

    गर्मी से बेहोश हुआ बंदर का बच्चा, पुलिसवाले ने CPR देकर ‘देवदूत’ बन बचाई जान

    May 31, 20240 Views

    Bihar में पुलिस सब इंस्पेक्टर की कितनी होती है सैलरी, PET के लिए जारी हुए एडमिट कार्ड

    May 31, 20240 Views

    Shamli News: बवाल करने वालों से सख्ती से निपटेगी पुलिस

    May 31, 20240 Views
    © 2026 Vikas Manthan. Designed by Sharp Web Technology.
    • Home
    • Lifestyle
    • Celebrities
    • Travel
    • Buy Now

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.