Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण परिवर्तन की नई कहानी: विकास की धुरी बनी महिलाएँ

    छत्तीसगढ़ में निर्णय–निर्माण की शक्ति बनाम प्रतिनिधित्व

    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Vikas Manthan
    Subscribe
    • आज की बात
    • देश
    • विदेश
      • अमेरिका
      • चीन
      • पाकिस्तान
      • ब्रिटेन
      • रूस
      • श्रीलंका
    • राज्य
      • छत्तीसगढ़
      • उत्तर प्रदेश
      • झारखंड
      • नई दिल्ली
      • बिहार
      • मध्यप्रदेश
      • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
      • गरियाबंद
      • दंतेवाड़ा
      • दुर्ग
      • बालोद
      • बिलासपुर
      • बीजापुर
    • मंथन
      • कृषि मंथन
      • जल मंथन
      • श्रम मंथन
      • स्वराज मंथन
      • नवचार मंथन
      • स्वास्थ्य मंथन
      • भू मंथन
      • बाल मंथन
      • जिनकी बात उनकी ज़बानी
      • खेल
    • महिला सशक्तिकरण
    • सर्वेक्षण
    • लाइफ़स्टाइल
      • फिल्में
      • Music
      • Fashion
      • Fitness
    Vikas Manthan
    You are at:Home»राज्य»छत्तीसगढ़»गोटुल : बस्तर की सांस्कृतिक धड़कन और मुरिया युवाओं का विश्वविद्यालय
    छत्तीसगढ़

    गोटुल : बस्तर की सांस्कृतिक धड़कन और मुरिया युवाओं का विश्वविद्यालय

    vikasBy vikasAugust 23, 2025Updated:August 23, 2025No Comments3 Mins Read14 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Email Reddit
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp Email

    परिचय : गोटुल क्या है?
    बस्तर अंचल की मुरिया जनजाति की संस्कृति में गोटुल केवल एक भवन नहीं, बल्कि युवाओं का सांस्कृतिक केंद्र और संगठन है। यहाँ अविवाहित युवक और युवतियां सदस्य बनते हैं। युवक को चेलिक और युवती को मोटियारी कहा जाता है। गोटुल की यह परंपरा न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि अनुशासन, संस्कृति और सामूहिक जीवन की शिक्षा भी देती है।

    गोटुल की सदस्यता और अनुशासन
    गोटुल में सदस्यता केवल अविवाहित युवाओं को दी जाती है। चेलिकों का नेतृत्व सिरेदार करता है और मोटियारिनों का नेतृत्व बेलोसा के हाथों में होता है। गोटुल की व्यवस्था चलाने के लिए एक समिति गठित होती है, जिसमें अलग-अलग पदनाम, अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाती हैं। गोटुल में अनुशासन का कड़ाई से पालन होता है और नियमों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है। विवाह के बाद सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है, क्योंकि गोटुल केवल अविवाहित युवाओं का संगठन माना जाता है।

    गोटुल का स्वरूप और निर्माण शैली
    गोटुल प्रायः गाँव के बीचोंबीच बनाया जाता है। इसका निर्माण लकड़ी, मिट्टी और घास से होता है। यह लकड़ी के खंभों पर टिकी हुई खपरैल या घास की छत से बना माण्डा जैसा होता है। गोटुल को घेरने के लिए छह से सात फुट ऊँची लकड़ी की बाड़ बनाई जाती है। सामने लंबा और समतल आंगन होता है, जिसमें गोटुल खाम्ब गाड़ा जाता है। गोटुल खाम्ब को सजाने के लिए लालटेन रखे जाते हैं। यही वह जगह है, जहाँ युवक-युवतियां पारंपरिक गीत और वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य करते हैं।

    नक्काशी और कलात्मक अभिव्यक्ति
    गोटुल केवल भवन नहीं है, बल्कि कला और सौंदर्यप्रियता का प्रतीक भी है। इसके खंभों और दीवारों पर पशु-पक्षियों, युवक-युवतियों, तीर-धनुष और बेल-बूटों की नक्काशी की जाती है। आड़ी-तिरछी और टेढ़ी रेखाओं से बनाई गई आकृतियाँ मुरिया कला की विशिष्टता दर्शाती हैं। गोटुल खाम्ब पर चिड़िया, गाय-बैल, जंगली जानवर और ज्यामितीय डिज़ाइन उकेरे जाते हैं, जो मुरिया जनजाति के प्रकृति से गहरे जुड़ाव को दिखाते हैं। यह नक्काशी मुरिया काष्ठ कला की उत्कृष्ट और बेजोड़ कृतियों में गिनी जाती है।

    गोटुल के नियम और परंपराएँ
    गोटुल केवल मनोरंजन का स्थान नहीं है, बल्कि यह अनुशासन और सामाजिक व्यवहार का विद्यालय भी है। यहाँ प्रत्येक सदस्य के लिए नियम तय होते हैं।

    • गोटुल में समय पर उपस्थित होना और सामूहिक गतिविधियों में भाग लेना अनिवार्य होता है।
    • वरिष्ठ चेलिक और मोटियारिन अनुशासन का पालन करवाते हैं और नियम तोड़ने वालों को दंड देते हैं।
    • गोटुल में पारंपरिक नृत्य, गीत, वाद्ययंत्र वादन और सामाजिक कार्यों का अभ्यास कराया जाता है।
    • यह युवाओं के लिए विवाह पूर्व जीवन, सामाजिक जिम्मेदारियों और परंपराओं की शिक्षा का केंद्र होता है।
    • अनुशासनहीनता जैसे झगड़ा करना, अशिष्ट व्यवहार करना या सामूहिक गतिविधियों से अनुपस्थित रहना दंडनीय होता है।

    इन परंपराओं से युवाओं में आपसी सहयोग, सामूहिकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

    गोटुल का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
    गोटुल मुरिया समाज के लिए केवल एक सांस्कृतिक केंद्र नहीं है, बल्कि यह अनुशासन और सामूहिकता का विद्यालय है। यह युवाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र है, जहाँ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों का बोध कराया जाता है। यह मनोरंजन और नृत्य-गीत का मंच है, जहाँ सामूहिकता और सौंदर्यबोध विकसित होता है। गोटुल परंपराओं और संस्कृति का संवाहक भी है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आदिवासी जीवन को जीवित रखता है।

    निष्कर्ष : गोटुल की धड़कन आज भी जीवित
    बस्तर की यह अनोखी परंपरा दिखाती है कि किस प्रकार एक आदिवासी समाज ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखा है। गोटुल आज भी मुरिया युवाओं के लिए संस्कार, अनुशासन और सामुदायिक जीवन का विश्वविद्यालय बना हुआ है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि संस्कृति तभी जीवित रहती है जब उसे जीया जाए, न कि केवल इतिहास की किताबों में पढ़ा जाए।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit WhatsApp Telegram Email
    Previous Articleकांकेर जिले के पाढ़रगांव में हर घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
    Next Article चोरभट्टी की ग्राम सभा : संघर्ष, भागीदारी और उम्मीद की कहानी
    vikas
    • Website

    Related Posts

    सतरेंगा की ग्रामसभा: जब गांव ने खुद अपना भाग्य लिखा

    August 3, 2025

    छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियाँ

    February 11, 2025

    “शुद्ध पेयजल की समस्या हो रही खत्म, गांव-गांव पहुँच गया जल जीवन मिशन”

    November 9, 2024
    Leave A Reply Cancel Reply

    Demo
    Top Posts

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025235 Views

    शिवनाथ नदी और उसकी ऐतिहासिक महत्ता:

    February 11, 202524 Views

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    March 8, 202623 Views

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण परिवर्तन की नई कहानी: विकास की धुरी बनी महिलाएँ

    March 8, 202617 Views
    Don't Miss
    महिला सशक्तिकरण March 8, 2026

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    शहीद वीर नारायण सिंह की भूमि पर सशक्तिकरण की नई कहानी छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले…

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण परिवर्तन की नई कहानी: विकास की धुरी बनी महिलाएँ

    छत्तीसगढ़ में निर्णय–निर्माण की शक्ति बनाम प्रतिनिधित्व

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण परिवर्तन की उत्प्रेरक महिलाएँ:लोक विकास कार्यक्रमों के संदर्भ में एक कथात्मक विश्लेषण

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    Demo
    About Us
    About Us
    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
    Our Picks

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    छत्तीसगढ़ में ग्रामीण परिवर्तन की नई कहानी: विकास की धुरी बनी महिलाएँ

    छत्तीसगढ़ में निर्णय–निर्माण की शक्ति बनाम प्रतिनिधित्व

    Most Popular

    गर्मी से बेहोश हुआ बंदर का बच्चा, पुलिसवाले ने CPR देकर ‘देवदूत’ बन बचाई जान

    May 31, 20240 Views

    Bihar में पुलिस सब इंस्पेक्टर की कितनी होती है सैलरी, PET के लिए जारी हुए एडमिट कार्ड

    May 31, 20240 Views

    Loksabha Election: पंजाब में चुनाव में खूब चला शराब, नशे व नोट का खेल, 795.75 करोड़ की नकदी-Drug व शराब जब्त

    May 31, 20240 Views
    © 2026 Vikas Manthan. Designed by Sharp Web Technology.
    • Home
    • Lifestyle
    • Celebrities
    • Travel
    • Buy Now

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.