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    छत्तीसगढ़

    सतरेंगा की ग्रामसभा: जब गांव ने खुद अपना भाग्य लिखा

    vikasBy vikasAugust 3, 2025Updated:August 23, 2025No Comments4 Mins Read4 Views
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    छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की घनी हरियाली के बीच बसा एक शांत, लेकिन जागरूकता की अलख जगाता गांव है – सतरेंगा। यहां की पहाड़ियां, झरने, और घने जंगल मानो खुद गांव से बात करते हैं। लेकिन सालों तक इन प्राकृतिक संपदाओं के बीच जीते गांववाले, संघर्ष और सीमाओं के साथ अपनी जिंदगी काटते रहे। वनोपज से गुजर-बसर, थोड़ी खेती, और बाकी समय शहरों की तरफ रोजगार की तलाश में पलायन – यही सर्रेंगा की पहचान थी।

    लेकिन एक दिन, जब गांव की चौपाल में बैठे कुछ बुज़ुर्गों और युवाओं के बीच बात शुरू हुई कि “हमारे पास सब कुछ है, फिर भी हम पीछे क्यों हैं?”, तब गांव में पेसा कानून की चर्चा छिड़ी। यह कानून कहता है कि ग्रामसभा खुद निर्णय ले सकती है, अपने संसाधनों की रक्षा कर सकती है, और आजीविका के रास्ते बना सकती है। यह सुनते ही गांव के लोगों की आंखों में उम्मीद की चमक दिखने लगी।

    धीरे-धीरे गांव में ग्रामसभा की बैठकों की गंभीरता बढ़ने लगी। पहले जहां दो-चार बुज़ुर्ग और पंच बैठते थे, अब वहां महिलाएं, युवा और हर परिवार से सदस्य शामिल होने लगे। एक नई सोच ने जन्म लिया – “अब विकास हम खुद करेंगे।”


    एक नई सुबह: पर्यटन से परिवर्तन की पहल

    एक दिन ग्रामसभा में चर्चा छिड़ी कि गांव में तो सुंदर पहाड़ियां हैं, साफ़ पानी के झरने हैं, और एक छोटा सा तालाब भी है — “अगर लोग इसे देखने आते हैं, तो हम इससे कुछ कमा क्यों नहीं सकते?” यहीं से जन्म हुआ सामुदायिक पर्यटन के विचार का।

    गांव के युवाओं ने तय किया कि वे बांस से नाव बनाएंगे, महिलाएं लोकल व्यंजन बनाएंगी, और मिलकर झरनों, घाटों की साफ़-सफाई करेंगे। और ऐसा ही हुआ। कुछ ही महीनों में गांव ने अपनी ही मेहनत से पर्यटन स्थल बना दिया। बांस की नावों पर बोटिंग, पारंपरिक भोजन, वनोपज की बिक्री, लोकगीत, और हाथों से बनाए गए हस्तशिल्प – यह सब अब सर्रेंगा की पहचान बन गया।

    “पर्यटन पहले हमारे लिए सपना था, अब हमारी रोज़ी-रोटी है।”
    — टोकेश्वर, ग्राम का युवक


    महिलाओं का नेतृत्व: बदलाव की असली मशाल

    इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका सिर्फ मददगार नहीं थी — वे बदलाव की असली सूत्रधार बनीं। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने खाना बनाना, पर्यटकों की मेज़बानी, उत्पाद बेचना और साफ-सफाई जैसे कार्यों को बखूबी संभाला।

    फुलमती दीदी, जो पहले पंचायत में कुछ बोलने से भी हिचकती थीं, अब पर्यटन कमेटी की सदस्य हैं और आय का हिसाब खुद रखती हैं। उन्होंने बताया,

    “पहले हम सिर्फ रसोई तक सीमित थे, अब हम निर्णय लेने वाली बन गई हैं।”


    ‘बैंबू राफ्टिंग’ – बांस से बना रोजगार का पुल

    पर्यटन को और रोचक बनाने के लिए गांव के युवाओं ने बांस से नावें बनाईं। इन नावों पर बैठकर पर्यटक तालाब और झरने के आसपास की सैर करते हैं। 100 रुपए प्रति सवारी के हिसाब से यह सेवा न केवल लोकप्रिय बनी, बल्कि दर्जनों युवाओं को स्थायी काम भी मिला।

    रविवार और छुट्टियों के दिन, सर्रेंगा अब भीड़भाड़ वाला स्थल बन जाता है। बाहर से आने वाले पर्यटक यहां की हरियाली, आतिथ्य और लोकसंस्कृति से अभिभूत हो जाते हैं।


    कमाई नहीं, निवेश बना ग्रामसभा की नई पहचान

    पर्यटन से जो कमाई हुई, उसे गांव ने शानदार तरीके से निवेश किया। स्कूल में रंगाई-पुताई हुई, आंगनवाड़ी में बच्चों के लिए सामग्री आई, वृद्धों और विधवाओं के लिए ग्रामसभा ने सहायता दी। कोई ठेकेदार नहीं, कोई कमीशन नहीं – गांव खुद अपने पैसे से, खुद अपने लिए काम कर रहा है।

    “अब हर पैसा वहीं जाता है, जहाँ ज़रूरत होती है। और ज़रूरत हम तय करते हैं।”
    — ग्राम पंचायत सचिव


    बदलाव के आँकड़े जो कहानी कहते हैं

    विषयपहलेअब
    ग्रामसभा उपस्थिति20-30 लोग100+
    महिला भागीदारीनगण्य50% से अधिक
    पर्यटन से कमाईशून्य₹2 लाख+
    पलायनसामान्य80% तक कम
    स्थानीय रोजगारकेवल कृषिपर्यटन, नाव, रसोई, हस्तशिल्प

    अंत नहीं, शुरुआत है – सर्रेंगा की यात्रा अभी जारी है

    सर्रेंगा की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं है — यह हर उस समुदाय की प्रेरणा है जो अपने जंगल, अपनी संस्कृति और अपनी ग्रामसभा पर भरोसा करता है। यहां कोई बाहर से आकर विकास नहीं लाया। गांव ने खुद निर्णय लिया, खुद श्रम दिया, और खुद सफलता हासिल की।

    आज सर्रेंगा के बच्चे गांव में ही पढ़ाई करते हैं, महिलाएं खुद को आत्मनिर्भर मानती हैं, और पुरुष अब बाहर पलायन नहीं करते। बांस की नाव पर सवारी करते समय जो ठंडी हवा चेहरे से टकराती है — वह आजादी की हवा है, आत्मनिर्भरता की।

    “हम जंगल में रहते हैं, लेकिन अब जंगल हमारे लिए केवल लकड़ी नहीं, जीवन का रास्ता बन चुका है।”
    — फुलमती बाई, ग्रामसभा सदस्य

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