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    You are at:Home»महिला सशक्तिकरण»सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका
    महिला सशक्तिकरण

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    vikasBy vikasMarch 8, 2026No Comments5 Mins Read24 Views
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    Sonakhan
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    शहीद वीर नारायण सिंह की भूमि पर सशक्तिकरण की नई कहानी

    छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित ऐतिहासिक गांव सोनाखान, जिसे महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है, आज महिलाओं के सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास की एक नई मिसाल बन रहा है। यहां महिलाओं और किशोरियों की भागीदारी बढ़ाने तथा उनकी आजीविका को मजबूत बनाने के लिए कई पहलें की जा रही हैं।

    एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित “एसबीआई सम्मान – राष्ट्रीय नायकों को श्रद्धांजलि” कार्यक्रम के अंतर्गत गांव में महिला नेतृत्व विकास, कौशल प्रशिक्षण और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि गांव के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।


    जल, स्वच्छता और सफाई में महिलाओं की जिम्मेदारी

    सोनाखान में महिला समूहों ने गांव में स्वच्छता और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली है। महिलाएं सार्वजनिक शौचालयों के संचालन, वॉटर फिल्टर के रखरखाव और कचरा संग्रहण जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

    इससे गांव में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई है और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। यह पहल दिखाती है कि जब महिलाओं को अवसर मिलता है तो वे सामुदायिक नेतृत्व को प्रभावी रूप से निभा सकती हैं।


    प्रेरणा केंद्र: सिलाई से बढ़ी महिलाओं की आय

    महिलाओं को संगठित करने और उन्हें कौशल आधारित रोजगार से जोड़ने के लिए गांव में प्रेरणा केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र में अब तक 75 महिलाओं और किशोरियों को सिलाई प्रशिक्षण दिया गया है।

    प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कई महिलाओं ने स्वयं सिलाई कार्य शुरू कर दिया। वर्तमान में लगभग 60 महिलाएं घरों के कपड़ों के साथ-साथ बाहर के कपड़े भी सिल रही हैं।

    इन महिलाओं द्वारा ब्लाउज, सलवार-सूट, पिको-फॉल और कपड़ों की मरम्मत जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इस पहल से अब तक लगभग ₹1,25,200 की आय अर्जित की जा चुकी है।

    पहले जहां कई महिलाएं रोजगार के अभाव में घर तक सीमित थीं, वहीं अब वे अपनी आय का स्रोत स्वयं बना रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।


    युवा प्रशिक्षण केंद्र: बालिकाओं को मिल रही नई दिशा

    गांव में युवाओं को शारीरिक प्रशिक्षण, खेल गतिविधियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जोड़ने के लिए शहीद वीर नारायण सिंह युवा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है।

    इस केंद्र में अब तक 60 से अधिक बालिकाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं। इनमें से कई बालिकाओं ने जिला और राज्य स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है।

    प्रशिक्षण प्राप्त युवा-युवतियां अपनी पढ़ाई और तैयारी के साथ गांव के विकास कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे सरकारी योजनाओं के अंतर्गत गरीब परिवारों का पंजीयन कराने, पंचायत बैठकों में भाग लेने और पानी, स्वच्छता तथा कृषि से जुड़े मुद्दों को उठाने का कार्य कर रही हैं।

    गांव का पर्यटन प्रबंधन और युवा प्रशिक्षण केंद्र का संचालन भी स्थानीय युवाओं द्वारा ही किया जा रहा है।


    कंप्यूटर शिक्षा से बढ़ रही तकनीकी क्षमता

    तकनीकी युग में महिलाओं और बालिकाओं को डिजिटल कौशल से जोड़ना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिछले दो वर्षों में 220 से अधिक बालिकाएं कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं।

    यह प्रशिक्षण तीन माह की अवधि का होता है, जिसमें कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी के साथ डिजिटल कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और उनके लिए भविष्य के रोजगार के नए अवसर भी खुल रहे हैं।


    गर्ल्स कॉमन रूम: संवाद और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित स्थान

    किशोरी बालिकाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गर्ल्स कॉमन रूम विकसित किया गया है। इस सुविधा से लगभग 150 बालिकाएं लाभान्वित हो रही हैं।

    यह स्थान माहवारी के दौरान आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ संवाद और परामर्श का सुरक्षित मंच भी उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से बालिकाएं आपस में चर्चा कर माहवारी से जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर रही हैं और स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बन रही हैं।


    शहीद वीर नारायण सिंह की प्रेरणा

    सोनाखान केवल एक गांव नहीं बल्कि इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर है। शहीद वीर नारायण सिंह ने अपने समय में समाज के कमजोर वर्गों और महिलाओं के सम्मान के लिए संघर्ष किया था।

    आज उसी प्रेरणा से गांव में महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।


    एसबीआई फाउंडेशन और सामुदायिक साझेदारी

    इन सभी पहलों को एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से संचालित “एसबीआई सम्मान – राष्ट्रीय नायकों को श्रद्धांजलि” कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस कार्यक्रम के अंतर्गत सेंटर फॉर डेवलपमेंट सपोर्ट, स्थानीय स्वशासन संस्थाओं और जिला प्रशासन के साथ मिलकर गांव में महिला नेतृत्व विकास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ाव तथा पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।


    सोनाखान में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की यह पहल ग्रामीण विकास का एक प्रेरक उदाहरण है। कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक नेतृत्व के माध्यम से यहां महिलाएं न केवल अपने जीवन में बदलाव ला रही हैं, बल्कि पूरे गांव के विकास की दिशा भी बदल रही हैं।

    यह कहानी बताती है कि जब महिलाओं को अवसर, संसाधन और सहयोग मिलता है, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की सबसे मजबूत शक्ति बन सकती हैं।

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