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    बिहार

    ग्राम सेवा कार्यक्रम: गया जिले में समग्र ग्रामीण विकास की दिशा में एक अभिनव पहल

    vikasBy vikasJuly 31, 2025Updated:August 27, 2025No Comments6 Mins Read9 Views
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    परिचय
    भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सतत और समावेशी विकास की दिशा में अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में से एक सराहनीय पहल है – ग्राम सेवा कार्यक्रम, जिसे SBI फाउंडेशन द्वारा सहभागी शिक्षण केंद्र (SSK) के साथ मिलकर बिहार राज्य के गया जिले के गुरुआ प्रखंड में लागू किया गया है। यह कार्यक्रम पाँच गाँवों – जयपुर, नदौरा, नदौरी, नगवांगढ़ और सराय टांड़ – में मार्च 2025 से फरवरी 2027 तक संचालित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य इन ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर को बहुआयामी क्षेत्रों में सुधार कर समग्र रूप से ऊपर उठाना है।


    कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

    SBI फाउंडेशन की यह पहल “बैंकिंग से परे सेवा” की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, और सामाजिक संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सतत हस्तक्षेप किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के तहत, सहभागी शिक्षण केंद्र (SSK) जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन और सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    इस आधारभूत अध्ययन का उद्देश्य था कि पाँच चयनित गाँवों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सेवा सुविधाएँ, संसाधन की उपलब्धता, तथा लोगों की जरूरतों और चुनौतियों की पहचान कर सकें, ताकि कार्यक्रम के प्रभावों को मापा जा सके और आगे की योजनाओं का निर्माण सटीक रूप से किया जा सके।


    अध्ययन की पद्धति और क्षेत्र

    यह अध्ययन भागीदारी आधारित दृष्टिकोण और मिश्र विधियों (quantitative और qualitative दोनों) पर आधारित था। इसमें घर-घर जाकर सर्वेक्षण, फोकस ग्रुप चर्चा, पंचायत प्रतिनिधियों और सेवा प्रदाताओं से संवाद, तथा उपलब्ध शासकीय दस्तावेजों का अध्ययन शामिल था।

    कुल 250 परिवारों का सर्वे किया गया – प्रत्येक गाँव में लगभग 43-58 परिवारों का चयन किया गया, जिससे 30% की नमूना कवरेज सुनिश्चित हुई। इन गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जल और स्वच्छता, आजीविका, डिजिटलीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर आंकड़े और अनुभव एकत्र किए गए।


    गया ज़िले और गुरुआ प्रखंड का सामाजिक परिप्रेक्ष्य

    गया जिला विकास की दृष्टि से अभी भी चुनौतियों से जूझ रहा है। महिला साक्षरता दर केवल 55%, एनिमीया (रक्ताल्पता) की दर उच्चतम, और शौचालय की सुविधा केवल 20.8% घरों में है। गरीबी, भूमिहीनता, परंपरागत खेती और सीमित संसाधन जैसे कारक विकास को बाधित कर रहे हैं।

    गुरुआ प्रखंड, जिसमें ये पाँच गाँव आते हैं, एक विविध सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र है, परंतु बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इसे पिछड़े क्षेत्रों में सम्मिलित करती है। इस कारण, यह क्षेत्र “ग्राम सेवा कार्यक्रम” जैसे हस्तक्षेपों के लिए एक आदर्श स्थल बनता है।


    शिक्षा की स्थिति

    शिक्षा क्षेत्र में अध्ययन ने गंभीर लैंगिक असमानता और संसाधनों की कमी को उजागर किया। औसत साक्षरता दर 73.7% रही, परंतु महिला साक्षरता मात्र 65.1% पाई गई। नदौरा और नदौरी जैसे गाँवों में महिला साक्षरता और भी नीचे है।

    विद्यालय संरचना में नदौरी गाँव में एक भी विद्यालय नहीं है, जबकि केवल सराय टांड़ गाँव में उच्च माध्यमिक विद्यालय उपलब्ध है। पाँचों गाँवों में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला और बालिकाओं के लिए अलग कक्ष की अनुपस्थिति पाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल शिक्षा और विज्ञान आधारित पढ़ाई तक बच्चों की पहुँच अत्यंत सीमित है।


    स्वास्थ्य, पोषण और जल-सैनिटेशन (WASH)

    स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। केवल सराय टांड़ में एक उप-स्वास्थ्य केंद्र है, शेष सभी गाँव मोबाइल हेल्थ वैन या आसपास के केंद्रों पर निर्भर हैं।

    30% परिवारों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, जोड़ों के दर्द और अन्य बीमारियाँ पाई गईं। नदौरा और नदौरी जैसे गाँवों में बीमारियों की दर अधिक है, जो खराब पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता से जुड़ी समस्याओं को दर्शाता है।

    जल आपूर्ति के क्षेत्र में नल कनेक्शन तो कई गाँवों में हैं, परंतु केवल 4.4% परिवारों को प्रतिदिन जल प्राप्त होता है। लगभग 25% परिवारों को कभी पानी नहीं मिलता, जिससे पीने के पानी की सुरक्षा और महिलाओं के श्रम पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

    शौचालय के संदर्भ में, केवल 56% घरों में ही शौचालय हैं। नदौरी और नदौरा जैसे गाँवों में यह आंकड़ा 35% से भी नीचे है। निर्मित शौचालयों में भी लगभग 13% उपयोग में नहीं हैं, जो निर्माण की गुणवत्ता और जल उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को दर्शाता है।


    आजीविका और कृषि परिदृश्य

    अधिकांश परिवार वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। 90% से अधिक किसान सिंचाई के लिए केवल वर्षा पर निर्भर हैं, जिससे फसल उत्पादन अस्थिर और सीमित होता है।

    नगवांगढ़ और सराय टांड़ जैसे गाँवों में भूमि स्वामित्व अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि नदौरी में 80% परिवार भूमिहीन हैं। छोटे और बंटे हुए भूखंडों के कारण उत्पादन में विविधता और मशीनीकरण नहीं हो पाता।

    पशुपालन में सबसे अधिक प्रचलन बकरी पालन और मुर्गी पालन का है, लेकिन पशु चिकित्सा सुविधाओं, चारा, और प्रशिक्षण की भारी कमी है। इससे महिलाओं द्वारा किए जाने वाले पशुपालन कार्यों में आय की संभावना सीमित रह जाती है।


    कंपोस्टिंग

    कुल 250 परिवारों में से केवल 30 परिवारों में ही रसोई बगिया पाई गई, विशेषकर नगवांगढ़ और सराय टांड़ में। अन्य गाँवों में जागरूकता और भूमि की अनुपलब्धता मुख्य बाधा हैं।

    कचरा प्रबंधन में लगभग 67% घर गोबर के कंडे बनाने में लगे हैं। वैज्ञानिक पद्धतियों जैसे NADEP, वर्मी कंपोस्ट या घुरुवा गड्ढे का उपयोग अत्यंत कम है। इससे न केवल जैविक खेती की संभावना सीमित होती है, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव भी बढ़ते हैं।


    सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की पहुंच

    आधार कार्ड (98.8%), बैंक खाता (96.8%) और राशन कार्ड (91.6%) की कवरेज अच्छी है। परंतु मनरेगा जॉब कार्ड केवल 34.4% परिवारों के पास है, जो आजीविका सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी बाधा है।

    जाति और निवास प्रमाण पत्रों की अनुपलब्धता (लगभग 25% परिवारों में) शासकीय योजनाओं से लाभ लेने में अड़चन पैदा करती है। अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत मात्र 3% परिवारों को लाभ मिला है, जो अत्यंत गरीबों की पहचान और पहुँच में असमानता को दर्शाता है।


    निष्कर्ष और सुझाव

    इस आधारभूत अध्ययन से स्पष्ट है कि चयनित गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, स्वच्छता, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में गहरी खामियाँ और संभावनाएँ दोनों मौजूद हैं।

    मुख्य अनुशंसाएँ:

    • स्कूलों में डिजिटल सुविधाएँ, किशोरी बालिकाओं के लिए विश्राम कक्ष।
    • सभी गाँवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर, जल स्रोतों की मरम्मत, और स्वच्छता पर जागरूकता।
    • भूमिहीनों के लिए वैकल्पिक आजीविका योजनाएं जैसे बकरी पालन, किचन गार्डन और SHG आधारित उद्यम।
    • शासकीय योजनाओं से छूटे हुए परिवारों की पहचान और समावेशन हेतु विशेष अभियान।
    • पशु स्वास्थ्य, कंपोस्टिंग और कृषि में नवाचार हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम।
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