Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Vikas Manthan
    Subscribe
    • आज की बात
    • देश
    • विदेश
      • अमेरिका
      • चीन
      • पाकिस्तान
      • ब्रिटेन
      • रूस
      • श्रीलंका
    • राज्य
      • छत्तीसगढ़
      • उत्तर प्रदेश
      • झारखंड
      • नई दिल्ली
      • बिहार
      • मध्यप्रदेश
      • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
      • गरियाबंद
      • दंतेवाड़ा
      • दुर्ग
      • बालोद
      • बिलासपुर
      • बीजापुर
    • मंथन
      • कृषि मंथन
      • जल मंथन
      • श्रम मंथन
      • स्वराज मंथन
      • नवचार मंथन
      • स्वास्थ्य मंथन
      • भू मंथन
      • बाल मंथन
      • जिनकी बात उनकी ज़बानी
      • खेल
    • महिला सशक्तिकरण
    • सर्वेक्षण
    • लाइफ़स्टाइल
      • Music
      • Fashion
      • Fitness
    Vikas Manthan
    You are at:Home»कृषि मंथन»जंगल की छांव में बसा जीवन: बैगा जनजाति और डोंगर खेती का लुप्त होता अस्तित्व
    कृषि मंथन

    जंगल की छांव में बसा जीवन: बैगा जनजाति और डोंगर खेती का लुप्त होता अस्तित्व

    vikasBy vikasJune 10, 2025No Comments4 Mins Read5 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Email Reddit
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp Email

    जंगल के साथ सहजीवन की विरासत

    छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की लोरमी तहसील के ग्राम राजक में निवास करने वाली बैगा जनजाति भारत की पारंपरिक और विशेष संरक्षित जनजातियों में से एक है। इनका जीवन जंगल पर आश्रित नहीं, बल्कि उससे गहराई से जुड़ा हुआ है। कहावत है – “जब कुछ नहीं था, तब जंगल था” – और यह वाक्य उनके जीवन के हर पहलू में सजीव रूप में नजर आता है। जंगल न केवल उनके भोजन, दवा और रोजगार का स्रोत रहा है, बल्कि उनकी संस्कृति, विश्वास और पहचान भी रहा है।

    बेवार (डोंगर) खेती: परंपरा, पोषण और पारिस्थितिकी का संगम

    बैगा समुदाय द्वारा की जाने वाली बेवार या डोंगर खेती एक प्रकार की स्थानांतरित कृषि पद्धति थी। यह खेती पहाड़ी क्षेत्रों में बिना हल चलाए की जाती थी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती थी। इसमें 40-45 प्रकार के बीजों का मिश्रण बोया जाता था – जैसे कोदो, कुटकी, माड़िया, सांवा, सल्हीर, अरहर, बदरा आदि। इस मिश्रित कृषि पद्धति से खाद्य सुरक्षा, पोषण और जैव विविधता का संतुलन बना रहता था। बीजों का आदान-प्रदान भी समुदायों के बीच सहयोग और आत्मनिर्भरता को दर्शाता था।

    जंगल से जीवन, संस्कृति और आस्था की डोर

    बैगा समुदाय के लिए जंगल महज संसाधन नहीं, बल्कि उनके जीवन का केंद्र रहा है। सूखा, अकाल या विपदा के समय जंगल ने उन्हें सहारा दिया – महुआ, बेर, कंद-मूल जैसे वनोपज उनके भोजन का आधार बने। उनके सामाजिक रीति-रिवाज, त्योहार, और धार्मिक विश्वास भी जंगलों से जुड़े रहे हैं। कुछ वन क्षेत्रों को वे पवित्र मानते हैं और उन्हें पीढ़ियों से बिना काटे संरक्षित रखते आए हैं।

    परंपरागत औषधीय ज्ञान: जंगल ही इनका अस्पताल

    बैगा जनजाति जंगल को एक जीवित औषधालय मानती है। उनके वैद्य (परंपरागत चिकित्सक) जड़ी-बूटियों और झाड़-फूंक के माध्यम से उपचार करते रहे हैं। पेट दर्द, बुखार, मलेरिया, सूजन, पथरी जैसी बीमारियों के लिए वे पेड़ों की छाल, पत्तियां, जड़ें और कंदों का उपयोग करते थे। लेकिन वन कटाई और बाजार में औषधीय पौधों की अवैध बिक्री के कारण कई दुर्लभ वनस्पतियाँ अब लुप्त हो रही हैं। इसके परिणामस्वरूप युवा पीढ़ी पारंपरिक चिकित्सा से दूर हो रही है और बाहरी चिकित्सा संस्थानों पर निर्भर होती जा रही है।

    बदलाव की आहट: जंगल से विस्थापन और पहचान का संकट

    वनों के राष्ट्रीयकरण के बाद बैगा समुदाय को उनके पारंपरिक डोंगर क्षेत्रों से नीचे बसाया गया। इस कदम ने न केवल उनकी कृषि प्रणाली को तोड़ा, बल्कि खान-पान, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता को भी गहरा आघात पहुंचाया। बेवार खेती प्रतिबंधित हो गई, जिससे मोटे अनाज और स्थानीय बीज लुप्त हो गए, पोषण सुरक्षा कमजोर हुई और पारिस्थितिक ज्ञान धीरे-धीरे खत्म होने लगा।

    डोंगर खेती: इतिहास की ओर

    आज की स्थिति में डोंगर खेती लगभग इतिहास बन चुकी है। जंगल से उनका संबंध कमजोर हुआ है और पारंपरिक जीवनशैली बाजार आधारित व्यवस्था में विलीन हो रही है। खेती, औषधि और सामाजिक संगठन की स्वायत्तता जो एक समय गांवों की पहचान थी, अब केवल बुजुर्गों की यादों में रह गई है।

    क्या खो रहा है भारत?

    बैगा समुदाय की यह कहानी सिर्फ एक जनजाति की नहीं है, यह उस गहराई से जुड़े जीवन दर्शन की कहानी है जो प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित है। यदि हम इस पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित नहीं करते, तो हम न केवल एक समुदाय की पहचान, बल्कि एक संपूर्ण जैव-सांस्कृतिक विरासत खो देंगे।



    बैगा जनजाति और डोंगर खेती की यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिकता के नाम पर हमने क्या खोया है। यह आवश्यक है कि ऐसे समुदायों की पारंपरिक कृषि, चिकित्सा और सांस्कृतिक प्रणालियों को दस्तावेजित किया जाए, उन्हें संरक्षित किया जाए और नई पीढ़ी को इससे जोड़ा जाए – ताकि हमारे जंगल, हमारी विविधता और हमारी जड़ें जीवित रह सकें।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit WhatsApp Telegram Email
    Previous Articleवन का हक, समुदाय का संघर्ष: कोयाइटपाल की मिसाल
    Next Article वडसगांव: जब युवाओं ने जंगल को मरने नहीं दिया
    vikas
    • Website

    Related Posts

    जल और ज़मीन से खुशहाली की ओर: कबीरधाम की वाटरशेड क्रांति

    August 3, 2025

    विश्व जल दिवस: खमढ़ोडगी ग्राम में सामूहिक सिंचाई प्रबंधन से जल संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि

    March 23, 2025

    छत्तीसगढ़ में 8.95 लाख मीट्रिक टन धान की हुई खरीदी, किसानों को 1575.16 करोड़ का भुगतान

    November 25, 2024
    Leave A Reply Cancel Reply

    Top Posts

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    September 13, 2026989 Views

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025240 Views

    शिवनाथ नदी और उसकी ऐतिहासिक महत्ता:

    February 11, 202541 Views

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    March 8, 202627 Views
    Don't Miss
    शहरी स्वशासन September 13, 2026

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    भारत तीव्र गति से शहरीकरण की ओर अग्रसर है। जनगणना 2011 के अनुसार देश की…

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सालेभाट में तैयार किए गए 50 हजार सीड बॉल

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    About Us
    About Us

    Disclaimer: विकास मंथन, विकास समुदाय के लिए स्वतंत्र मीडिया प्लैटफॉर्म है।

    हम यह विश्वास करते है कि निरंतर संवाद एवं संवाद में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है, इस क्रम यह प्लैटफॉर्म समस्त वर्गो को यह अवसर प्रदाय करता है कि वे अपनी बात रखे तथा दूसरे की बात से अपनी समझ बनाये। सशक्त समाज निर्माण एवं स्थायी विकास प्राप्त करने के लिये पूर्व के अनुभवों, एक दूसरे के अनुभवों, चुनौतियों एवं नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस लिहाज से यह प्लैटफॉर्म विभिन्न विचारों, बेहतर सफलताओं, कठिन समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों को साझा करने का समान अवसर प्रदाय करता है।

    हम लोगो द्वारा लोगो के लिये लिखे गए सबसे नए विचारों, अनुभवों और अंतरदृष्टि को प्रकाशित करते हैं। हमारा काम वस्तूओं को सरल और प्रासंगिक बनाना है ताकि जो लोग अपने काम कर रहे, उनके काम को और बेहतर तरीके से किया जा सके और उसे आगे बढ़ाया जा सके।

    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
    Our Picks

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    Most Popular

    स्वास्थ्य शिबिर का आयोजन

    July 25, 20240 Views

    माहवारी की आधारभुत जानकारी से दूर हुई स्वास्थ्य की समस्याएं

    July 26, 20240 Views

    SBI Gram Seva Program in Kanker District: A Story of Transformation

    July 26, 20240 Views
    © 2026 Vikas Manthan. Designed by Sharp Web Technology.
    • Home
    • Lifestyle
    • Celebrities
    • Travel
    • Buy Now

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.