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    स्वास्थ्य मंथन

    मधु राजगोड़: अपने प्रयासों से बदली बस्ती की सेहत की तस्वीर

    vikasBy vikasMarch 2, 2025No Comments4 Mins Read3 Views
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    परिचय स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित समुदायों को जागरूक बनाना और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन जब समुदाय का कोई अपना व्यक्ति इस दिशा में पहल करता है, तो बदलाव की गति तेज हो जाती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है मधु राजगोड़ की, जिन्होंने अपने गाँव राजगोड़ पारा में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    राजगोड़ पारा: परंपराओं से आधुनिकता की ओर छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायत चटौद में स्थित राजगोड़ पारा में कुल 30 परिवार निवास करते हैं, जिनकी जनसंख्या लगभग 150 है। यह पारा उप-स्वास्थ्य केंद्र से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ के लोग पारंपरिक व्यवसाय जैसे मांगने का कार्य, मनिहारी, गोदना (टैटू बनाना) और आयुर्वेदिक दवाइयाँ बेचने का काम करते हैं। धार्मिक आस्थाओं में गहराई से जुड़े होने के कारण वे आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से दूर रहते थे और स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए घरेलू उपचार व झाड़-फूंक को प्राथमिकता देते थे।

    स्वास्थ्य विभाग और मितानीन के प्रयासों के बावजूद लोग स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने से हिचकिचाते थे। यहाँ तक कि गंभीर बीमारियों और गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के दौरान भी वे पारंपरिक उपचारों पर ही निर्भर रहते थे।

    नेतृत्व की शुरुआत: मधु राजगोड़ का संकल्प मधु राजगोड़ स्वयं इसी पारा की निवासी हैं और अपने समुदाय की मानसिकता एवं स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भली-भांति समझती थीं। पहले वे भी पारंपरिक उपचार पद्धतियों को ही प्राथमिकता देती थीं, लेकिन 2022 में जब वे ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति (VHNCS) की सदस्य बनीं, तो उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया।

    स्वास्थ्य बैठकों में भागीदारी – मधु ने अन्य महिलाओं के साथ स्वास्थ्य बैठकों में भाग लेना शुरू किया और देखा कि वहाँ समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाता है। उन्होंने महसूस किया कि यदि उनके समुदाय को भी इन सेवाओं से जोड़ा जाए, तो स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हो सकता है।

    समुदाय को प्रेरित करने की शुरुआत – दिसंबर 2021 में एक किशोरी की कम उम्र में शादी और गर्भधारण के कारण मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया। मधु राजगोड़ ने इसे एक उदाहरण के रूप में उपयोग किया और ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर लोगों को समझाया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ना कितना आवश्यक है।

    धीरे-धीरे विश्वास जगाना – • मधु ने अपने पारा की महिलाओं और पुरुषों को समझाने का प्रयास किया कि घरेलू उपचार सभी समस्याओं का समाधान नहीं हैं।
    • उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और अन्य संगठनों के सहयोग से स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करवाया। • पहले कुछ ही परिवार स्वास्थ्य केंद्र जाने को तैयार हुए, लेकिन जब उन्हें बेहतर उपचार मिला, तो धीरे-धीरे अन्य परिवार भी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित होने लगे।

    बदलाव के स्पष्ट परिणाम

    स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँच बढ़ी – पहले जहाँ गिने-चुने लोग ही स्वास्थ्य केंद्र जाते थे, अब 30 में से 28 परिवार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ चुके हैं।

    सामाजिक सोच में बदलाव – झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचारों पर अंधविश्वास अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, और लोग आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने लगे हैं।

    गर्भवती महिलाओं को विशेष लाभ – अब गर्भवती महिलाओं की नियमित जाँच, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव की संख्या में वृद्धि हुई है।

    बीमारियों की पहचान और इलाज में सुधार – पहले जहाँ लोग गंभीर बीमारियों को नजरअंदाज कर देते थे, अब वे समय पर स्वास्थ्य केंद्र जाकर इलाज करवा रहे हैं।

    निष्कर्ष मधु राजगोड़ की इस पहल ने न केवल उनके समुदाय की स्वास्थ्य स्थिति को सुधारने में मदद की, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी लाया। उनकी कहानी दर्शाती है कि जब एक व्यक्ति दृढ़ संकल्प के साथ बदलाव लाने का प्रयास करता है, तो पूरा समुदाय उसके साथ खड़ा हो जाता है। स्वास्थ्य जागरूकता और सेवाओं की पहुँच बढ़ाने की दिशा में मधु का यह योगदान आने वाले समय में और भी प्रेरणादायक साबित होगा।

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