Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Vikas Manthan
    Subscribe
    • आज की बात
    • देश
    • विदेश
      • अमेरिका
      • चीन
      • पाकिस्तान
      • ब्रिटेन
      • रूस
      • श्रीलंका
    • राज्य
      • छत्तीसगढ़
      • उत्तर प्रदेश
      • झारखंड
      • नई दिल्ली
      • बिहार
      • मध्यप्रदेश
      • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
      • गरियाबंद
      • दंतेवाड़ा
      • दुर्ग
      • बालोद
      • बिलासपुर
      • बीजापुर
    • मंथन
      • कृषि मंथन
      • जल मंथन
      • श्रम मंथन
      • स्वराज मंथन
      • नवचार मंथन
      • स्वास्थ्य मंथन
      • भू मंथन
      • बाल मंथन
      • जिनकी बात उनकी ज़बानी
      • खेल
    • महिला सशक्तिकरण
    • सर्वेक्षण
    • लाइफ़स्टाइल
      • फिल्में
      • Music
      • Fashion
      • Fitness
    Vikas Manthan
    You are at:Home»स्वास्थ्य मंथन»मधु राजगोड़: अपने प्रयासों से बदली बस्ती की सेहत की तस्वीर
    स्वास्थ्य मंथन

    मधु राजगोड़: अपने प्रयासों से बदली बस्ती की सेहत की तस्वीर

    vikasBy vikasMarch 2, 2025No Comments4 Mins Read0 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Email Reddit
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp Email

    परिचय स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित समुदायों को जागरूक बनाना और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन जब समुदाय का कोई अपना व्यक्ति इस दिशा में पहल करता है, तो बदलाव की गति तेज हो जाती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है मधु राजगोड़ की, जिन्होंने अपने गाँव राजगोड़ पारा में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    राजगोड़ पारा: परंपराओं से आधुनिकता की ओर छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायत चटौद में स्थित राजगोड़ पारा में कुल 30 परिवार निवास करते हैं, जिनकी जनसंख्या लगभग 150 है। यह पारा उप-स्वास्थ्य केंद्र से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ के लोग पारंपरिक व्यवसाय जैसे मांगने का कार्य, मनिहारी, गोदना (टैटू बनाना) और आयुर्वेदिक दवाइयाँ बेचने का काम करते हैं। धार्मिक आस्थाओं में गहराई से जुड़े होने के कारण वे आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से दूर रहते थे और स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए घरेलू उपचार व झाड़-फूंक को प्राथमिकता देते थे।

    स्वास्थ्य विभाग और मितानीन के प्रयासों के बावजूद लोग स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने से हिचकिचाते थे। यहाँ तक कि गंभीर बीमारियों और गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के दौरान भी वे पारंपरिक उपचारों पर ही निर्भर रहते थे।

    नेतृत्व की शुरुआत: मधु राजगोड़ का संकल्प मधु राजगोड़ स्वयं इसी पारा की निवासी हैं और अपने समुदाय की मानसिकता एवं स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भली-भांति समझती थीं। पहले वे भी पारंपरिक उपचार पद्धतियों को ही प्राथमिकता देती थीं, लेकिन 2022 में जब वे ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति (VHNCS) की सदस्य बनीं, तो उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया।

    स्वास्थ्य बैठकों में भागीदारी – मधु ने अन्य महिलाओं के साथ स्वास्थ्य बैठकों में भाग लेना शुरू किया और देखा कि वहाँ समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाता है। उन्होंने महसूस किया कि यदि उनके समुदाय को भी इन सेवाओं से जोड़ा जाए, तो स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हो सकता है।

    समुदाय को प्रेरित करने की शुरुआत – दिसंबर 2021 में एक किशोरी की कम उम्र में शादी और गर्भधारण के कारण मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया। मधु राजगोड़ ने इसे एक उदाहरण के रूप में उपयोग किया और ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर लोगों को समझाया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ना कितना आवश्यक है।

    धीरे-धीरे विश्वास जगाना – • मधु ने अपने पारा की महिलाओं और पुरुषों को समझाने का प्रयास किया कि घरेलू उपचार सभी समस्याओं का समाधान नहीं हैं।
    • उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और अन्य संगठनों के सहयोग से स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करवाया। • पहले कुछ ही परिवार स्वास्थ्य केंद्र जाने को तैयार हुए, लेकिन जब उन्हें बेहतर उपचार मिला, तो धीरे-धीरे अन्य परिवार भी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित होने लगे।

    बदलाव के स्पष्ट परिणाम

    स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँच बढ़ी – पहले जहाँ गिने-चुने लोग ही स्वास्थ्य केंद्र जाते थे, अब 30 में से 28 परिवार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ चुके हैं।

    सामाजिक सोच में बदलाव – झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचारों पर अंधविश्वास अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, और लोग आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने लगे हैं।

    गर्भवती महिलाओं को विशेष लाभ – अब गर्भवती महिलाओं की नियमित जाँच, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव की संख्या में वृद्धि हुई है।

    बीमारियों की पहचान और इलाज में सुधार – पहले जहाँ लोग गंभीर बीमारियों को नजरअंदाज कर देते थे, अब वे समय पर स्वास्थ्य केंद्र जाकर इलाज करवा रहे हैं।

    निष्कर्ष मधु राजगोड़ की इस पहल ने न केवल उनके समुदाय की स्वास्थ्य स्थिति को सुधारने में मदद की, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी लाया। उनकी कहानी दर्शाती है कि जब एक व्यक्ति दृढ़ संकल्प के साथ बदलाव लाने का प्रयास करता है, तो पूरा समुदाय उसके साथ खड़ा हो जाता है। स्वास्थ्य जागरूकता और सेवाओं की पहुँच बढ़ाने की दिशा में मधु का यह योगदान आने वाले समय में और भी प्रेरणादायक साबित होगा।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit WhatsApp Telegram Email
    Previous Articleराजनांदगांव जिले में भूजल में आर्सेनिक की समस्या
    Next Article विश्व जल दिवस: खमढ़ोडगी ग्राम में सामूहिक सिंचाई प्रबंधन से जल संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि
    vikas
    • Website

    Related Posts

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    January 4, 2026

    ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से उपस्वास्थ्य केंद्र में सुधार: एक बदलाव की कहानी

    February 24, 2025

    समुदाय आधारित स्वास्थ्य निगरानी: प्रवासी परिवारों के बुजुर्गों की देखभाल सुनिश्चित करना

    February 8, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    Demo
    Top Posts

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025235 Views

    शिवनाथ नदी और उसकी ऐतिहासिक महत्ता:

    February 11, 202521 Views

    चोरभट्टी की ग्राम सभा : संघर्ष, भागीदारी और उम्मीद की कहानी

    August 27, 202515 Views

    कांकेर जिले के पाढ़रगांव में हर घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल

    August 22, 202512 Views
    Don't Miss
    स्वास्थ्य मंथन January 4, 2026

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    जैविक कीट प्रबंधन और पोषण वाटिका से बदलती ग्रामीण खेती सुबह की थाली में परोसी…

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    तेज बहाव से टूटा गेरसा बाँध

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    Demo
    About Us
    About Us
    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
    Our Picks

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    Most Popular

    गर्मी से बेहोश हुआ बंदर का बच्चा, पुलिसवाले ने CPR देकर ‘देवदूत’ बन बचाई जान

    May 31, 20240 Views

    Bihar में पुलिस सब इंस्पेक्टर की कितनी होती है सैलरी, PET के लिए जारी हुए एडमिट कार्ड

    May 31, 20240 Views

    Shamli News: बवाल करने वालों से सख्ती से निपटेगी पुलिस

    May 31, 20240 Views
    © 2026 Vikas Manthan. Designed by Sharp Web Technology.
    • Home
    • Lifestyle
    • Celebrities
    • Travel
    • Buy Now

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.