राजनांदगांव जिला, छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में भूजल में आर्सेनिक संदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गई है। विशेष रूप से अंबागढ़ चौकी ब्लॉक के कौड़िकसा गाँव में आर्सेनिक की उच्च सांद्रता पाई गई है, जहाँ लगभग 10% जनसंख्या आर्सेनिक से संबंधित बीमारियों से प्रभावित है।
आर्सेनिक संदूषण के स्रोत
इस क्षेत्र में आर्सेनिक संदूषण के संभावित स्रोतों में भूवैज्ञानिक संरचनाएँ प्रमुख हैं। स्थानीय चट्टानों में आर्सेनिक की उपस्थिति और भूजल के साथ उनकी अंतःक्रिया से जल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ सकती है। इसके अलावा, कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग भी आर्सेनिक संदूषण में योगदान कर सकता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
लंबे समय तक आर्सेनिक युक्त जल के सेवन से आर्सेनिकोसिस नामक बीमारी हो सकती है, जिसके लक्षणों में त्वचा पर घाव, परिधीय न्यूरोपैथी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएँ, मधुमेह, हृदय रोग, और त्वचा एवं आंतरिक अंगों का कैंसर शामिल हैं।
वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
गर्मी के मौसम में, आर्सेनिक प्रभावित दो दर्जन से अधिक गाँवों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में कमी हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को फिर से आर्सेनिक युक्त जल पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
समाधान और प्रयास
- वैकल्पिक जल स्रोतों का विकास: नदी, झील, या वर्षा जल संचयन के माध्यम से स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- जल शोधन तकनीकों का उपयोग: आर्सेनिक हटाने के लिए विशेष फिल्टर और शोधन प्रणालियों का स्थापना।
- सार्वजनिक जागरूकता: ग्रामीणों को आर्सेनिक के दुष्प्रभावों और स्वच्छ जल के महत्व के बारे में शिक्षित करना।
- नियमित जल परीक्षण: भूजल की नियमित जाँच करके आर्सेनिक स्तर की निगरानी करना।
समय पर और प्रभावी कदम उठाकर, राजनांदगांव जिले में आर्सेनिक संदूषण की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है और जनस्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है।
