गर्मियों के दिन थे। जामगांव-ज के उपस्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती महिला भर्ती थी। प्रसव का समय नजदीक था, लेकिन जब डॉक्टर और नर्स ने हाथ धोने की कोशिश की, तो उन्हें एहसास हुआ कि प्रसव कक्ष में हैंडवाश यूनिट ही नहीं थी। गर्मी बढ़ती जा रही थी, और वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए न तो पंखा था और न ही कूलर। स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
समस्या की पहचान: जब लोगों ने अपनी आवाज़ उठाई
ग्राम पंचायत जामगांव-ज में हर साल की तरह ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के तहत कार्ययोजना निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। पंचायत प्रतिनिधियों को बताया गया कि योजना निर्माण में सभी वर्गों और संस्थाओं की भागीदारी आवश्यक है। इस दौरान जन आरोग्य समिति के सदस्यों ने उपस्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति पर चर्चा की।
मार्च 2024 में हुई जन आरोग्य समिति की बैठक में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी परेशानियाँ साझा कीं:
✔️ हैंडवाश यूनिट की अनुपस्थिति – प्रसव के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को बार-बार हाथ धोने की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए उचित सुविधा नहीं थी।
✔️ स्क्रीनिंग पर्दे की कमी – प्रसव कक्ष में महिलाओं की गोपनीयता बनी रहे, इसके लिए स्क्रीनिंग पर्दा जरूरी था।
✔️ गर्मी से राहत की कमी – मरीजों को भर्ती के बाद असुविधा हो रही थी क्योंकि वार्ड में पंखे और कूलर नहीं थे।
समाधान: पंचायत और समुदाय की एकजुटता
जब पंचायत की बैठक में यह मुद्दा उठा, तो सभी सहमत हुए कि इसे GPDP के तहत प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों और जन आरोग्य समिति के सदस्यों ने मिलकर समाधान खोजने का निर्णय लिया। स्वास्थ्य निधि के तहत आवश्यक सुधार कार्यों को शामिल किया गया और मई-जून 2024 में निम्नलिखित कार्य किए गए:
✔️ प्रसव कक्ष में हैंडवाशिंग यूनिट की स्थापना – जिससे संक्रमण का खतरा कम हुआ और सुरक्षित प्रसव संभव हुआ।
✔️ स्क्रीनिंग पर्दा लगाया गया – ताकि गर्भवती महिलाओं की गोपनीयता बनी रहे।
✔️ वार्ड रूम में पंखे और कूलर लगाए गए – जिससे भर्ती मरीजों को गर्मी से राहत मिली।
परिणाम: जब बदलाव दिखने लगा
जब जुलाई की तेज गर्मी आई, तो अब वार्ड में भर्ती मरीजों को पहले जैसी समस्या नहीं हो रही थी। प्रसव कक्ष में नर्स और डॉक्टर आसानी से हाथ धो सकते थे, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा बेहतर हुई। महिलाओं की गोपनीयता बनी रही, जिससे वे ज्यादा सहज महसूस करने लगीं।
एक सफल प्रयास की कहानी
सिर्फ 12,500 रुपये के खर्च से हुए इन सुधारों ने न सिर्फ स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बदली, बल्कि यह दिखाया कि जब पंचायत, समुदाय और समितियाँ मिलकर काम करती हैं, तो बड़े बदलाव भी संभव होते हैं।
यह कहानी सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र की नहीं है, बल्कि यह प्रमाण है कि सही योजना, भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से गाँव की बुनियादी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है। जामगांव-ज का यह बदलाव GPDP के सफल क्रियान्वयन का एक शानदार उदाहरण बन गया।
