Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Vikas Manthan
    Subscribe
    • आज की बात
    • देश
    • विदेश
      • अमेरिका
      • चीन
      • पाकिस्तान
      • ब्रिटेन
      • रूस
      • श्रीलंका
    • राज्य
      • छत्तीसगढ़
      • उत्तर प्रदेश
      • झारखंड
      • नई दिल्ली
      • बिहार
      • मध्यप्रदेश
      • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
      • गरियाबंद
      • दंतेवाड़ा
      • दुर्ग
      • बालोद
      • बिलासपुर
      • बीजापुर
    • मंथन
      • कृषि मंथन
      • जल मंथन
      • श्रम मंथन
      • स्वराज मंथन
      • नवचार मंथन
      • स्वास्थ्य मंथन
      • भू मंथन
      • बाल मंथन
      • जिनकी बात उनकी ज़बानी
      • खेल
    • महिला सशक्तिकरण
    • सर्वेक्षण
    • लाइफ़स्टाइल
      • फिल्में
      • Music
      • Fashion
      • Fitness
    Vikas Manthan
    You are at:Home»स्वराज मंथन»सिलपहरी: अधिकार की प्रतीक्षा में जुझारू जंगल प्रहरी
    स्वराज मंथन

    सिलपहरी: अधिकार की प्रतीक्षा में जुझारू जंगल प्रहरी

    vikasBy vikasJuly 6, 2025Updated:August 27, 2025No Comments4 Mins Read3 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Email Reddit
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp Email
    CFR, Livelihood,

    ग्राम – सिलपहरी | विकासखंड – मरवाही | जिला – गौरेला, पेण्ड्रा, मरवाही

    जहां जंगल साँस लेते हैं, वहाँ कुछ सपने भी रहते हैं — छत्तीसगढ़ के मरवाही अंचल के हरे-भरे विस्तार में बसा है सिलपहरी, एक ऐसा गांव जो प्राकृतिक संपदाओं की गोद में तो है, लेकिन अधिकारों की छांव से अब भी वंचित है।

    यह कहानी एक ऐसे समुदाय की है, जिसने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया — लेकिन अब तक उन्हें वह पत्र नहीं मिला, जो उनके परंपरागत संबंध को कानूनी मान्यता देता।


    प्राकृतिक समृद्धि के बीच अधिकार की छाया अधूरी

    सिलपहरी गांव घने जंगलों और जल धाराओं से घिरा है। यह क्षेत्र न केवल जैव-विविधता, औषधीय पौधों और इमारती लकड़ी से भरपूर है, बल्कि रेत खनन और वन कटाई जैसी गंभीर चुनौतियों का भी सामना कर रहा है।

    गांव के लोगों ने जब इन गतिविधियों से अपने जंगल को संकट में देखा, तो उन्होंने सामूहिक रूप से सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के लिए अपनी आवाज़ उठाई।


    वन की रखवाली में महिलाओं की अगुवाई

    यह गांव केवल पुरुष नेतृत्व वाला नहीं है। महिलाएँ यहां वन की संरक्षक हैं। वे हर शनिवार बैठक करती हैं और रविवार को सुबह-सुबह वन भ्रमण के लिए निकलती हैं। इसके अलावा, सप्ताह के अन्य दिनों में भी 3-4 लोग जंगल की निगरानी करते हैं — कभी गुपचुप तरीके से, तो कभी समूह बनाकर।

    यह सतर्कता और जिम्मेदारी दर्शाती है कि वन इनके लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि एक जीवनपद्धति है।


    बाहरी हस्तक्षेप और संघर्ष की जमीनी हकीकत

    विगत वर्षों में बाहरी लोगों द्वारा जंगल में आग लगाना, नदी से रेत का अवैध उत्खनन, और वन्य क्षेत्र में अतिक्रमण जैसी घटनाएं लगातार सामने आईं।

    गांववालों ने कई बार विभागीय शिकायतें कीं, जिनका असर कुछ दिनों तक दिखा — लेकिन जल्द ही खनन फिर से शुरू हो गया।

    इस बीच, महिलाएं और ग्रामसभा के सदस्य डटे रहे — निगरानी करते रहे, बैठकें करते रहे, और जंगल को बचाने के लिए प्रतिबद्ध रहे।


    कागज़ी प्रक्रिया में उलझा कानूनी हक़

    29 जनवरी 2023 से सिलपहरी ग्रामसभा ने सामुदायिक वन अधिकार की प्रक्रिया शुरू की। करीब 6 माह के भीतर सभी दस्तावेज़, सीमांकन, बैठकें और सर्वेक्षण पूरे कर 24 जुलाई 2023 को अधिकार पत्र हेतु दावा प्रस्तुत किया गया।

    लेकिन उसके बाद, विभाग द्वारा GPS सीमांकन में तकनीकी त्रुटि बताई गई। ग्रामसभा ने बार-बार राजस्व एवं वन विभाग से संपर्क किया, लेकिन सीमांकन ठीक से न हो पाने के कारण अधिकार पत्र जारी नहीं हो सका।


    अधिकार न सही, कर्तव्य से पीछे नहीं हटे

    भले ही अब तक कानूनी अधिकार नहीं मिला हो, लेकिन ग्रामसभा ने जंगल की रक्षा के संकल्प में कोई कमी नहीं आने दी। वे आज भी निगरानी कर रहे हैं, महिलाएं भ्रमण कर रही हैं, और समुदाय अपने स्तर पर वन की सुरक्षा कर रहा है।


    आशा की राह, संकल्प की लौ

    सिलपहरी के लोग आज भी आशा से भरे हैं। उन्हें विश्वास है कि एक दिन अधिकार पत्र मिलेगा — और तब वे:

    • रेत उत्खनन को रोकने में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे
    • वन की कटाई पर स्थायी नियंत्रण पा सकेंगे
    • आजीविका को बेहतर कर सकेंगे
    • ग्रामसभा आधारित वन प्रबंधन योजना को लागू कर सकेंगे

    उनकी सबसे बड़ी आशा है — “हमें जंगल चाहिए, लेकिन अपने तरीके से, अपनी परंपरा के अनुसार, और अपनी जिम्मेदारी के साथ।”


    जंगल बचा है, अब अधिकार की बारी है

    सिलपहरी केवल एक गांव नहीं है — यह एक प्रतीक है उन हजारों समुदायों का, जो परंपरा, प्रकृति और अपने अधिकारों के बीच पुल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    इस गांव की महिलाएं, बुजुर्ग, युवा – सभी बता रहे हैं कि अधिकार केवल मांगने से नहीं मिलते, जिम्मेदारी निभाने से पुख्ता होते हैं।

    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit WhatsApp Telegram Email
    Previous Articleकोयाइटपाल: जंगल की गोद से उठी अधिकार की आवाज़
    Next Article मध्यप्रदेश में फसलों को जानवरों से बचाएगा ‘जाली सुरक्षा’ योजना, आधा खर्च देगी सरकार
    vikas
    • Website

    Related Posts

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025

    चोरभट्टी की ग्राम सभा : संघर्ष, भागीदारी और उम्मीद की कहानी

    August 27, 2025

    वन यात्रा: खमढोड़गी गांव की सामुदायिक ताकत से आजीविका विकास की मिसाल

    July 31, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    Demo
    Top Posts

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025235 Views

    शिवनाथ नदी और उसकी ऐतिहासिक महत्ता:

    February 11, 202521 Views

    चोरभट्टी की ग्राम सभा : संघर्ष, भागीदारी और उम्मीद की कहानी

    August 27, 202515 Views

    कांकेर जिले के पाढ़रगांव में हर घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल

    August 22, 202512 Views
    Don't Miss
    स्वास्थ्य मंथन January 4, 2026

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    जैविक कीट प्रबंधन और पोषण वाटिका से बदलती ग्रामीण खेती सुबह की थाली में परोसी…

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    तेज बहाव से टूटा गेरसा बाँध

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    Demo
    About Us
    About Us
    Facebook X (Twitter) Pinterest YouTube WhatsApp
    Our Picks

    ज़हरमुक्त सब्जी: सेहत, मिट्टी और भविष्य की नई कहानी

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    सामुदायिक वन संसाधन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता ग्राम भुरभूसी

    Most Popular

    गर्मी से बेहोश हुआ बंदर का बच्चा, पुलिसवाले ने CPR देकर ‘देवदूत’ बन बचाई जान

    May 31, 20240 Views

    Bihar में पुलिस सब इंस्पेक्टर की कितनी होती है सैलरी, PET के लिए जारी हुए एडमिट कार्ड

    May 31, 20240 Views

    Shamli News: बवाल करने वालों से सख्ती से निपटेगी पुलिस

    May 31, 20240 Views
    © 2026 Vikas Manthan. Designed by Sharp Web Technology.
    • Home
    • Lifestyle
    • Celebrities
    • Travel
    • Buy Now

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.