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    स्वराज मंथन

    सिलपहरी: अधिकार की प्रतीक्षा में जुझारू जंगल प्रहरी

    vikasBy vikasJuly 6, 2025Updated:August 27, 2025No Comments4 Mins Read6 Views
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    CFR, Livelihood,

    ग्राम – सिलपहरी | विकासखंड – मरवाही | जिला – गौरेला, पेण्ड्रा, मरवाही

    जहां जंगल साँस लेते हैं, वहाँ कुछ सपने भी रहते हैं — छत्तीसगढ़ के मरवाही अंचल के हरे-भरे विस्तार में बसा है सिलपहरी, एक ऐसा गांव जो प्राकृतिक संपदाओं की गोद में तो है, लेकिन अधिकारों की छांव से अब भी वंचित है।

    यह कहानी एक ऐसे समुदाय की है, जिसने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया — लेकिन अब तक उन्हें वह पत्र नहीं मिला, जो उनके परंपरागत संबंध को कानूनी मान्यता देता।


    प्राकृतिक समृद्धि के बीच अधिकार की छाया अधूरी

    सिलपहरी गांव घने जंगलों और जल धाराओं से घिरा है। यह क्षेत्र न केवल जैव-विविधता, औषधीय पौधों और इमारती लकड़ी से भरपूर है, बल्कि रेत खनन और वन कटाई जैसी गंभीर चुनौतियों का भी सामना कर रहा है।

    गांव के लोगों ने जब इन गतिविधियों से अपने जंगल को संकट में देखा, तो उन्होंने सामूहिक रूप से सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के लिए अपनी आवाज़ उठाई।


    वन की रखवाली में महिलाओं की अगुवाई

    यह गांव केवल पुरुष नेतृत्व वाला नहीं है। महिलाएँ यहां वन की संरक्षक हैं। वे हर शनिवार बैठक करती हैं और रविवार को सुबह-सुबह वन भ्रमण के लिए निकलती हैं। इसके अलावा, सप्ताह के अन्य दिनों में भी 3-4 लोग जंगल की निगरानी करते हैं — कभी गुपचुप तरीके से, तो कभी समूह बनाकर।

    यह सतर्कता और जिम्मेदारी दर्शाती है कि वन इनके लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि एक जीवनपद्धति है।


    बाहरी हस्तक्षेप और संघर्ष की जमीनी हकीकत

    विगत वर्षों में बाहरी लोगों द्वारा जंगल में आग लगाना, नदी से रेत का अवैध उत्खनन, और वन्य क्षेत्र में अतिक्रमण जैसी घटनाएं लगातार सामने आईं।

    गांववालों ने कई बार विभागीय शिकायतें कीं, जिनका असर कुछ दिनों तक दिखा — लेकिन जल्द ही खनन फिर से शुरू हो गया।

    इस बीच, महिलाएं और ग्रामसभा के सदस्य डटे रहे — निगरानी करते रहे, बैठकें करते रहे, और जंगल को बचाने के लिए प्रतिबद्ध रहे।


    कागज़ी प्रक्रिया में उलझा कानूनी हक़

    29 जनवरी 2023 से सिलपहरी ग्रामसभा ने सामुदायिक वन अधिकार की प्रक्रिया शुरू की। करीब 6 माह के भीतर सभी दस्तावेज़, सीमांकन, बैठकें और सर्वेक्षण पूरे कर 24 जुलाई 2023 को अधिकार पत्र हेतु दावा प्रस्तुत किया गया।

    लेकिन उसके बाद, विभाग द्वारा GPS सीमांकन में तकनीकी त्रुटि बताई गई। ग्रामसभा ने बार-बार राजस्व एवं वन विभाग से संपर्क किया, लेकिन सीमांकन ठीक से न हो पाने के कारण अधिकार पत्र जारी नहीं हो सका।


    अधिकार न सही, कर्तव्य से पीछे नहीं हटे

    भले ही अब तक कानूनी अधिकार नहीं मिला हो, लेकिन ग्रामसभा ने जंगल की रक्षा के संकल्प में कोई कमी नहीं आने दी। वे आज भी निगरानी कर रहे हैं, महिलाएं भ्रमण कर रही हैं, और समुदाय अपने स्तर पर वन की सुरक्षा कर रहा है।


    आशा की राह, संकल्प की लौ

    सिलपहरी के लोग आज भी आशा से भरे हैं। उन्हें विश्वास है कि एक दिन अधिकार पत्र मिलेगा — और तब वे:

    • रेत उत्खनन को रोकने में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे
    • वन की कटाई पर स्थायी नियंत्रण पा सकेंगे
    • आजीविका को बेहतर कर सकेंगे
    • ग्रामसभा आधारित वन प्रबंधन योजना को लागू कर सकेंगे

    उनकी सबसे बड़ी आशा है — “हमें जंगल चाहिए, लेकिन अपने तरीके से, अपनी परंपरा के अनुसार, और अपनी जिम्मेदारी के साथ।”


    जंगल बचा है, अब अधिकार की बारी है

    सिलपहरी केवल एक गांव नहीं है — यह एक प्रतीक है उन हजारों समुदायों का, जो परंपरा, प्रकृति और अपने अधिकारों के बीच पुल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    इस गांव की महिलाएं, बुजुर्ग, युवा – सभी बता रहे हैं कि अधिकार केवल मांगने से नहीं मिलते, जिम्मेदारी निभाने से पुख्ता होते हैं।

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