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    महिला सशक्तिकरण

    वन धन विकास केंद्र बना महिलाओं की आजीविका का सहारा

    vikasBy vikasJune 30, 2025Updated:August 25, 2025No Comments3 Mins Read9 Views
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    ग्राम – कुनकुरी | विकासखंड – कुनकुरी | जिला – जशपुर

    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले का कुनकुरी गांव आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुका है। यहां की एक साधारण महिला सोफिया खातून ने न केवल अपने परिवार को आर्थिक संकट से उबारा, बल्कि गाँव की दर्जनों महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।

    समूह गठन से शुरू हुई बदलाव की यात्रा

    पति की मृत्यु के बाद जब सोफिया खातून के परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी, तब उन्होंने 2014 में 11 अन्य गरीब महिलाओं के साथ मिलकर ‘सहयोग हीरा’ नामक महिला स्व-सहायता समूह का गठन किया। समूह के सदस्यों ने बैंक खाता खोलकर मासिक बचत शुरू की और धीरे-धीरे स्वयं को संगठित करते हुए वित्तीय गतिविधियों की ओर बढ़ीं।

    वन धन विकास केंद्र से आय के नए अवसर

    वर्ष 2019 में शासन द्वारा कुनकुरी में वन धन विकास केंद्र की स्थापना की गई, जिसमें सहयोग हीरा समूह को संचालन की जिम्मेदारी दी गई। साथ ही, अन्य 30 महिला समूहों को भी इससे जोड़ा गया। वन धन केंद्र के माध्यम से प्रथम वर्ष में ही 500 क्विंटल साल-बीज की खरीदी की गई, साथ ही कोदो-कुटकी, रागी, और इमली जैसे वनोपजों की भी व्यापक खरीद और प्रसंस्करण हुआ।

    महिलाओं ने इमली गोटा खरीदकर फुल इमली जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए। इन गतिविधियों से समूह की प्रत्येक महिला को सालाना औसतन ₹6,000 की आय हुई, जिससे वे अपने बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी कर सकीं।

    प्रशिक्षण और नवाचार से सशक्तिकरण को मिली गति

    2022-23 में जिला प्रशासन और TRIFED के सहयोग से महिला समूहों को वनोपज प्रसंस्करण, दस्तावेजीकरण, बैंकिंग, और विपणन पर विशेष प्रशिक्षण दिए गए। इसके अलावा महिलाओं को कोदो-कुटकी की साफ-सफाई और पैकेजिंग तकनीक, फूड सेफ्टी और ब्रांडिंग जैसे विषयों पर भी दक्ष किया गया। इससे उनके उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार में मांग दोनों बढ़ीं।

    हाट-बाजार और मेलों में उत्साहजनक सहभागिता

    समूह की महिलाओं ने जिला स्तरीय आदिवासी मेला, विकासखंड स्तरीय महिला हाट और वन उपज उत्सव जैसे आयोजनों में भाग लिया। उन्होंने कोदो-कुटकी के लड्डू, फुल इमली, और रागी बिस्किट जैसे उत्पादों को प्रदर्शित कर ₹45,000 से अधिक की आय अर्जित की।

    डिजिटल जुड़ाव से बढ़ा दायरा

    हाल ही में समूह की 10 महिलाओं को ई-कॉमर्स प्लेटफार्म ‘Flipkart Samarth’ से जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से अब उनके उत्पाद ऑनलाइन भी बिक रहे हैं। इससे उनकी मासिक आमदनी में ₹1,000 से ₹1,500 तक की बढ़ोतरी हुई है।

    सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत कदम

    सोफिया खातून और उनकी साथी महिलाओं की मेहनत और नेतृत्व से समूह अब न केवल आर्थिक रूप से मज़बूत हुआ है, बल्कि उनमें निर्णय लेने की क्षमता, दस्तावेज़ीकरण का ज्ञान और बैंकिंग लेन-देन की दक्षता भी विकसित हुई है। शासन के साथ बेहतर समन्वय और निरंतर प्रशिक्षण ने वन धन विकास केंद्र के संचालन को एक मॉडल बना दिया है।


    निष्कर्ष:

    कुनकुरी की महिलाएं यह संदेश देती हैं कि जब महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और संगठित मंच मिलता है, तो वे न केवल स्वयं की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि समाज में परिवर्तन की एक मजबूत लहर भी खड़ी कर सकती हैं। वन धन केंद्र आज उनके आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है।

    Forest Gender Livelihood Women
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