
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पतोरा ग्राम पंचायत ने स्वच्छ भारत मिशन और मनरेगा (MGNREGS) के तहत चलाए गए स्वच्छता अभियानों में उल्लेखनीय प्रगति की है। पंचायत के नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से गांव में स्वच्छता और शौचालय निर्माण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जो अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
गांव की समस्या और उसके समाधान की शुरुआत
पतोरा गांव, जहां कभी स्वच्छता और पानी की कमी के कारण ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, अब स्वच्छता के क्षेत्र में आदर्श बन गया है। खुले में शौच की समस्या और अस्वच्छता के कारण होने वाली बीमारियां पहले इस गांव की बड़ी चुनौतियां थीं। ग्राम पंचायत और सरकार के संयुक्त प्रयासों से अब गांव पूरी तरह खुले में शौच मुक्त (ODF) बन चुका है।
स्वच्छता और शौचालय निर्माण के कार्यों का विवरण
1. शौचालय निर्माण और उपयोग:
गांव की कुल जनसंख्या: लगभग 1,200 लोग (250 घर)।
शौचालय निर्माण: 245 शौचालय बनाए गए, जिससे 100% घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध हुई।
2. जल प्रबंधन:
हैंडपंप और जल स्रोत: गांव में 8 हैंडपंप और 2 जलाशय पुनर्जीवित किए गए।
पाइपलाइन और जल आपूर्ति: गांव के 90% हिस्से में पाइपलाइन बिछाई गई, जिससे स्वच्छ पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हुई।
जल गुणवत्ता निगरानी: मासिक जल परीक्षण किया जाता है ताकि पानी सुरक्षित रहे।
3. ठोस और तरल कचरा प्रबंधन:
गांव में 2 ठोस कचरा प्रबंधन केंद्र स्थापित किए गए।
तरल कचरे के पुनर्चक्रण के लिए 3 यूनिट लगाए गए, जो पानी को सिंचाई में उपयोगी बनाते हैं।
बायोगैस प्लांट: जैविक कचरे का उपयोग कर ग्रामीणों को वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराया गया।
सामुदायिक जागरूकता और भागीदारी
1. महिला समूहों का योगदान:
गांव की महिलाओं ने स्वच्छता अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने घर-घर जाकर शौचालय के महत्व और स्वच्छता के लाभों को समझाया।
2. स्कूल और युवा भागीदारी:
स्कूली बच्चों ने दीवार लेखन, पोस्टर प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटकों के जरिए स्वच्छता संदेश फैलाया।
युवा संगठनों ने सफाई अभियान और जागरूकता रैलियों का आयोजन किया।
3. पंचायत और VWSC का योगदान:
ग्राम पंचायत और विलेज वॉटर एंड सेनिटेशन कमेटी (VWSC) ने जल और स्वच्छता प्रबंधन के लिए ठोस रणनीति बनाई।
स्वच्छता के परिणाम और लाभ
1. स्वास्थ्य पर प्रभाव:
जलजनित रोगों में कमी: दूषित पानी और खुले में शौच के कारण होने वाली बीमारियां, जैसे दस्त और डायरिया, में 70% तक कमी आई।
बच्चों और महिलाओं का स्वास्थ्य: स्वच्छता से बच्चों की स्कूल उपस्थिति और महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ।
2. पर्यावरण पर प्रभाव:
कचरे के उचित निपटान से जल और मिट्टी का प्रदूषण रुका।
जल स्रोत सुरक्षित और स्वच्छ हुए।
3. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव:
महिलाओं और बच्चों को खुले में शौच के लिए लंबी दूरी तय करने से मुक्ति मिली।
मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार मिला।
बायोगैस प्लांट से वैकल्पिक ऊर्जा के साधन उपलब्ध हुए।
सरकारी योजनाओं और फंडिंग का उपयोग
स्वच्छ भारत मिशन (SBM): फंडिंग और तकनीकी सहायता।
मनरेगा (MGNREGS): निर्माण कार्यों के लिए श्रम का उपयोग।
पंचायती राज संस्थान (PRI): स्थानीय नेतृत्व और योजना कार्यान्वयन।
आने वाली योजनाएं
ठोस और तरल कचरा प्रबंधन को और मजबूत करने की योजना।
जल संरक्षण के लिए अतिरिक्त जलाशयों का निर्माण।
नियमित IEC गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता और हैंडवाशिंग पर जागरूकता।
निष्कर्ष:
पतोरा ग्राम पंचायत ने यह साबित किया है कि सामुदायिक भागीदारी और मजबूत नेतृत्व के माध्यम से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। यह गांव आज स्वच्छता और जल प्रबंधन का एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है, जो अन्य ग्रामीण क्षेत्रों को प्रेरित करता है।