रायपुर:
छत्तीसगढ़ राज्य में भूजल संसाधन कृषि की रीढ़ के रूप में काम कर रहे हैं, खासकर जब राज्य की अधिकांश कृषि वर्षा आधारित है। राज्य की जलवायु और भूजल संरचनाएँ दोनों ही इसे एक जटिल स्थिति में डालती हैं, जहाँ भूजल की प्रबंधन और संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
राज्य में चार प्रमुख प्रकार के जलाशय प्रणालियाँ पाई जाती हैं – सैंडस्टोन, चूना पत्थर, क्रिस्टलीय और आलुवीय जलाशय। ये प्रणालियाँ राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भूजल के प्रवाह और गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। मानसून के दौरान राज्य में 1201 मिमी वर्षा होती है, जो भूजल के पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भूजल स्तर का हाल
प्री-मॉनसून अवधि में राज्य के 70% हिस्से में भूजल स्तर 5 से 10 मीटर के बीच है, जबकि पोस्ट-मॉनसून के बाद 71% क्षेत्र में भूजल स्तर 2 से 5 मीटर के बीच रहता है। यह संकेत है कि वर्षा के बाद भूजल पुनर्भरण बेहतर होता है। लेकिन, इस बढ़ती खपत के साथ भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है।
भूजल गुणवत्ता और चुनौतियाँ
भूजल सामान्यतः बाइकार्बोनेट प्रकार का होता है और सभी प्रकार के उपयोग के लिए उपयुक्त है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में आर्सेनिक, सल्फेट, फ्लोराइड और नाइट्रेट जैसे संदूषकों की समस्या सामने आई है। ऐसे में जल गुणवत्ता की निगरानी और सुधार पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

भूजल उपयोग
राज्य में भूजल, कुल सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं का 84.5% और 14.5% पूरा करता है। वार्षिक भूजल पुनर्भरण का अनुमान 11,579 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) है, जबकि मौजूदा खपत 4691 MCM है। भूजल खपत में पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 1990 में 5.11% थी, अब 44.37% तक पहुँच गई है।

प्रमुख क्षेत्रों में स्थिति
राज्य के 146 ब्लॉकों में से 41 ब्लॉक ऐसे हैं जहाँ भूजल की खपत 30% से कम है, वहीं 46 ब्लॉकों में 30% से 50%, 35 ब्लॉकों में 50% से 70% और 24 ब्लॉकों में 70% से अधिक है। इससे साफ है कि भूजल का अत्यधिक उपयोग उन क्षेत्रों में समस्या का कारण बन सकता है, जहाँ भूजल स्तर में गिरावट हो रही है।
भविष्य की रणनीतियाँ
- अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का निर्माण
- वैकल्पिक जल स्रोतों से दूषित मुक्त जल आपूर्ति
- वर्षा जल संचयन और कृत्रिम पुनर्भरण को बढ़ावा
- भूजल के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण
- किसानों को जल दक्षता तकनीकों के लिए प्रोत्साहित करना
राज्य सरकार और विभिन्न संगठनों को मिलकर छत्तीसगढ़ में भूजल प्रबंधन और संरक्षण के लिए योजनाएँ बनानी होंगी, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन संसाधनों को संरक्षित किया जा सके।
