Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Vikas Manthan
    Subscribe
    • आज की बात
    • देश
    • विदेश
      • अमेरिका
      • चीन
      • पाकिस्तान
      • ब्रिटेन
      • रूस
      • श्रीलंका
    • राज्य
      • छत्तीसगढ़
      • उत्तर प्रदेश
      • झारखंड
      • नई दिल्ली
      • बिहार
      • मध्यप्रदेश
      • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
      • गरियाबंद
      • दंतेवाड़ा
      • दुर्ग
      • बालोद
      • बिलासपुर
      • बीजापुर
    • मंथन
      • कृषि मंथन
      • जल मंथन
      • श्रम मंथन
      • स्वराज मंथन
      • नवचार मंथन
      • स्वास्थ्य मंथन
      • भू मंथन
      • बाल मंथन
      • जिनकी बात उनकी ज़बानी
      • खेल
    • महिला सशक्तिकरण
    • सर्वेक्षण
    • लाइफ़स्टाइल
      • Music
      • Fashion
      • Fitness
    Vikas Manthan
    You are at:Home»जल मंथन»शहरी स्वशासन»शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय
    शहरी स्वशासन

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    vikasBy vikasSeptember 13, 2026Updated:September 13, 2026No Comments6 Mins Read989 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Email Reddit
    Slum Water
    Slum Water supply
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest WhatsApp Email

    भारत तीव्र गति से शहरीकरण की ओर अग्रसर है। जनगणना 2011 के अनुसार देश की लगभग 31 प्रतिशत जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में निवास करती है, जबकि अनुमान है कि वर्ष 2036 तक यह बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो जाएगी। शहरी आबादी में वृद्धि के साथ मलिन बस्तियों (Slums) का विस्तार भी तेजी से हुआ है। देश में लगभग 6.5 करोड़ लोग स्लम बस्तियों में रहते हैं, जहाँ आजीविका के अवसर तो उपलब्ध हैं, लेकिन सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सेवाएँ अभी भी सीमित हैं। विडंबना यह है कि ये समुदाय शहरों की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले सफाईकर्मी, निर्माण श्रमिक, घरेलू कामगार, ठेला विक्रेता, रिक्शा चालक और अन्य अनौपचारिक श्रमिक हैं, फिर भी इन्हें शहरी विकास की योजनाओं का समान लाभ नहीं मिल पाता।

    शहरी जल सुरक्षा की वर्तमान स्थिति

    भारत सरकार ने शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए AMRUT 2.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 तथा सतत विकास लक्ष्य (SDG-6) के माध्यम से प्रत्येक परिवार तक कार्यशील नल कनेक्शन और सुरक्षित जल सेवाएँ पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। AMRUT 2.0 के अंतर्गत सभी शहरी परिवारों तक जलापूर्ति, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रित जल के उपयोग तथा शहरों के लिए Water Security Plan तैयार करने का प्रावधान है। इसी प्रकार 74वें संविधान संशोधन के अंतर्गत नगर निकायों को जलापूर्ति, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की जिम्मेदारी प्रदान की गई है। इसके बावजूद अनेक शहरों की मलिन बस्तियों में जल सेवाओं की गुणवत्ता और नियमितता आज भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

    रायपुर की मलिन बस्तियों से प्राप्त अनुभव

    रायपुर शहर की बैरागी बस्ती, बुलंदी बस्ती और व्यास तालाब डेरा बस्ती में किए गए सामुदायिक अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि जल संकट केवल जल स्रोतों की कमी का परिणाम नहीं है, बल्कि जल सेवाओं के प्रबंधन और संचालन से भी जुड़ा हुआ है। अध्ययन में लगभग 700 परिवार शामिल थे। तीनों बस्तियों में किसी न किसी रूप में जलापूर्ति की व्यवस्था उपलब्ध है—कहीं घर-घर नल कनेक्शन हैं, कहीं स्टैंडपोस्ट हैं और कहीं टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद अधिकांश परिवारों को पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाता।

    बैरागी बस्ती में 500 परिवारों के लिए तीन बोरवेल हैं, जिनमें से दो वर्षों से बंद पड़े हैं और एकमात्र चालू बोरवेल भी पर्याप्त पानी नहीं देता। नौ स्टैंडपोस्ट होने के बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं होती और समुदाय को प्रतिदिन टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है।

    दूसरी बस्ती में लगभग 14 वर्ष पुरानी ओवरहेड टंकी से घर-घर नल कनेक्शन उपलब्ध हैं, लेकिन जल वितरण असमान है। जिन परिवारों ने निजी मोटर लगा रखी है, उन्हें अपेक्षाकृत अधिक पानी मिलता है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आधा ड्रम पानी भी मुश्किल से प्राप्त होता है। जल गुणवत्ता पर अविश्वास के कारण अधिकांश परिवार पेयजल के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर हैं।

    व्यास तालाब डेरा बस्ती में घरों तक नल कनेक्शन होने के बावजूद लोग टंकी के पानी को पेयजल के रूप में स्वीकार नहीं करते। पूर्व में दूषित जल आपूर्ति तथा बरसात के दौरान पानी में केंचुए और जोंक जैसी शिकायतों ने समुदाय का विश्वास समाप्त कर दिया है। परिणामस्वरूप लोगों को प्रतिदिन 300 मीटर से 1 किलोमीटर तक दूर जाकर पेयजल लाना पड़ता है।

    केवल नल कनेक्शन पर्याप्त क्यों नहीं हैं?

    शहरी जल योजनाओं की सफलता अक्सर नल कनेक्शनों की संख्या से मापी जाती है, जबकि वास्तविक सफलता का आधार नियमित, पर्याप्त, गुणवत्तापूर्ण और समान जलापूर्ति होना चाहिए। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि कई परिवारों के पास नल कनेक्शन तो हैं, लेकिन जल दबाव कम होने, पाइपलाइन की खराब स्थिति, मोटर आधारित असमान वितरण, खराब जल गुणवत्ता तथा रखरखाव की कमी के कारण वे सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल अवसंरचना का निर्माण पर्याप्त नहीं है; सेवा की गुणवत्ता और निरंतरता अधिक महत्वपूर्ण है।

    स्थानीय जल शासन की भूमिका

    शहरी जल सेवाओं की नियमितता और गुणवत्ता काफी हद तक स्थानीय शासन पर निर्भर करती है। नगर निगमों की जिम्मेदारी केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण, नियमित संचालन एवं रखरखाव, जल गुणवत्ता परीक्षण, शिकायत निवारण और सेवा की निगरानी को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कई मलिन बस्तियों में जल स्रोत वर्षों तक खराब पड़े रहते हैं, पाइपलाइन की मरम्मत समय पर नहीं होती और जल गुणवत्ता परीक्षण के परिणाम समुदाय तक नहीं पहुँचते। इससे लोगों का भरोसा कमजोर होता है और वे वैकल्पिक, अक्सर असुरक्षित, जल स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं।

    सामुदायिक भागीदारी: जल सुरक्षा की आधारशिला

    विश्व स्तर पर किए गए अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि जिन क्षेत्रों में समुदाय जल सेवाओं की योजना, संचालन और निगरानी में सक्रिय भागीदारी निभाता है, वहाँ सेवाओं की गुणवत्ता और स्थिरता बेहतर होती है। भारत की शहरी जल नीतियाँ भी नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहित करती हैं, लेकिन व्यवहार में समुदाय की भूमिका अक्सर केवल लाभार्थी तक सीमित रह जाती है।

    मलिन बस्तियों में विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि घरेलू जल प्रबंधन की जिम्मेदारी मुख्यतः उन्हीं पर होती है। प्रत्येक बस्ती में महिला नेतृत्व वाली सामुदायिक जल एवं स्वच्छता समिति (Community Water & Sanitation Committee) का गठन किया जाना चाहिए, जो जल स्रोतों की निगरानी, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल वितरण, शिकायत निवारण तथा नगर निगम के साथ समन्वय का कार्य करे। इससे योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थानीय स्वामित्व बढ़ेगा।

    निगरानी एवं मूल्यांकन की आवश्यकता

    शहरी जल योजनाओं में निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा तो होती है, लेकिन सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन अपेक्षाकृत कम किया जाता है। प्रत्येक शहरी निकाय को ऐसे संकेतकों पर नियमित निगरानी करनी चाहिए, जिनमें प्रतिदिन जलापूर्ति की अवधि, प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता, जल गुणवत्ता, खराब जल स्रोतों की मरम्मत का समय, शिकायतों के समाधान की अवधि तथा नागरिक संतुष्टि शामिल हो। इन संकेतकों के आधार पर स्लम बस्तियों के लिए वार्षिक Water Security Audit किया जाना चाहिए, ताकि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके।

    नीतिगत सुधार की आवश्यकता

    शहरी जल सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए यह आवश्यक है कि स्लम बस्तियों को नगर विकास योजनाओं में प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक शहर में स्लम-विशिष्ट Water Security Plan तैयार किया जाए, जल गुणवत्ता की जानकारी सार्वजनिक की जाए, समुदाय आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाए तथा नगर निगम, समुदाय और तकनीकी संस्थानों के बीच नियमित संवाद स्थापित किया जाए। इसके साथ ही संचालन एवं रखरखाव (Operation & Maintenance) के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान तथा सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit) को भी संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए।

    रायपुर की मलिन बस्तियों का अनुभव स्पष्ट करता है कि शहरी जल संकट केवल जल स्रोतों की उपलब्धता का विषय नहीं है, बल्कि स्थानीय शासन, सेवा प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही का भी प्रश्न है। यदि शहरी भारत को वास्तव में जल-सुरक्षित बनाना है, तो योजनाओं का मूल्यांकन केवल नल कनेक्शनों की संख्या से नहीं, बल्कि इस आधार पर किया जाना चाहिए कि प्रत्येक परिवार को नियमित, सुरक्षित और सम्मानजनक जल सेवा प्राप्त हो रही है या नहीं।

    समावेशी शहरी विकास का अर्थ केवल अवसंरचना का निर्माण नहीं, बल्कि ऐसी जल सेवा व्यवस्था विकसित करना है जिसमें सरकार, नगर निकाय और समुदाय समान रूप से सहभागी हों। तभी “हर घर जल” का लक्ष्य वास्तव में “हर परिवार तक सुरक्षित जल” में परिवर्तित हो सकेगा।

    Chhattisgarh Jal Jeevan Mission JJM Slum Urban Water
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Reddit WhatsApp Telegram Email
    Previous Articleएसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान
    vikas
    • Website

    Related Posts

    बड़ेगौरी बना जल प्रबंधन का आदर्श मॉडल

    June 6, 2026

    कांकेर जिले के पाढ़रगांव में हर घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल

    August 22, 2025

    कोयाइटपाल: जंगल की गोद से उठी अधिकार की आवाज़

    July 3, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    Top Posts

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    September 13, 2026989 Views

    सामुदायिक वन संसाधन अधिकार से सशक्त होती ग्रामीण आजीविका

    October 18, 2025239 Views

    शिवनाथ नदी और उसकी ऐतिहासिक महत्ता:

    February 11, 202541 Views

    सोनाखान में महिलाओं की नई पहचान: एसबीआई सम्मान कार्यक्रम से बढ़ी भागीदारी और आजीविका

    March 8, 202627 Views
    Don't Miss
    शहरी स्वशासन September 13, 2026

    शहरी मलिन बस्तियों में पेयजल सुरक्षा: केवल नल कनेक्शन नहीं, बल्कि स्थानीय जल शासन और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकतापरिचय

    भारत तीव्र गति से शहरीकरण की ओर अग्रसर है। जनगणना 2011 के अनुसार देश की…

    एसबीआई सम्मान कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह की विचारधारा पर विकसित हो रहा है सोनाखान

    हमारे सरजू दादा: संकल्प, श्रम और संरक्षण की प्रेरक कहानी

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सालेभाट में तैयार किए गए 50 हजार सीड बॉल

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    About Us
    About Us

    Disclaimer: विकास मंथन, विकास समुदाय के लिए स्वतंत्र मीडिया प्लैटफॉर्म है।

    हम यह विश्वास करते है कि निरंतर संवाद एवं संवाद में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत किया जा सकता है, इस क्रम यह प्लैटफॉर्म समस्त वर्गो को यह अवसर प्रदाय करता है कि वे अपनी बात रखे तथा दूसरे की बात से अपनी समझ बनाये। सशक्त समाज निर्माण एवं स्थायी विकास प्राप्त करने के लिये पूर्व के अनुभवों, एक दूसरे के अनुभवों, चुनौतियो