रायपुर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम छत्तीसगढ़ी वीर सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह ने अपने प्राणों की आहुति जनहित, न्याय और सामाजिक समानता के लिए दी। उन्होंने भूख से पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा हेतु साहूकारों का विरोध किया तथा अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए वीरगति प्राप्त की। ऐसे जननायक एवं न्यायप्रिय स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति और विचारों को जीवंत रखने व उनको सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से उनके जन्मस्थान ग्राम सोनाखान का विकास एसबीआई फाउंडेशन द्वारा “एसबीआई सम्मान – राष्ट्रीय नायकों को श्रद्धांजलि” कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है।
पिछले दो वर्षों में इस कार्यक्रम के अंतर्गत शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, शासकीय विद्यालयों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों का नवीनीकरण, पेयजल फिल्टर, सोलर स्ट्रीट लाइट, हाट-बाजार शेड, ओपन जिम, ठोस कचरा प्रबंधन, ग्राम सेवा केंद्र तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया गया है। इसके साथ ही “शहीद वीर नारायण सिंह युवा प्रशिक्षण केंद्र” की स्थापना भी की गई है, जहाँ युवाओं को पुलिस, सेना एवं अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए शारीरिक एवं शैक्षणिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों को समाज में पुनः स्थापित करना, सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करना तथा उनके जन्मस्थान को एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना है।
शहीद वीर नारायण सिंह युवा प्रशिक्षण केंद्र: इस कार्यक्रम के अंतर्गत आसपास के 10 गांवों के 180 से अधिक युवाओं ने युवा प्रशिक्षण केंद्र में पंजीयन कर प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस केंद्र के माध्यम से युवाओं में नेतृत्व, संवाद एवं प्रबंधन क्षमता का विकास हो रहा है। प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप युवा पुलिस, वनरक्षक एवं अन्य सेवाओं की शारीरिक तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। अब तक 16 युवाओं ने पुलिस की शारीरिक परीक्षा, 2 युवाओं ने शिक्षक पात्रता परीक्षा, 07 युवक वनरक्षक की शारीरीक परिक्षा पास की है तथा 02 युवाओं को पुलिस में नियुक्ति हुई, वहीं 12 बच्चों ने खो-खो एवं एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में ब्लॉक, जिला तथा संभाग स्तर पर पदक जीतकर ग्राम सोनाखान का नाम रोशन किया है। इसके अतिरिक्त 10 से अधिक युवाओं ने केंद्र से कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार अपनाया है तथा शासकीय एवं निजी संस्थानों में ऑपरेटर एवं सहायक के रूप में कार्यरत हैं। यह प्रशिक्षण केंद्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्राम सोनाखान जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर तथा राज्य मुख्यालय से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित एक आदिवासी क्षेत्र है, जहां युवाओं के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में गांव में ही प्रशिक्षण की व्यवस्था उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: तकनीकी युग को ध्यान में रखते हुए सोनाखान के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने के लिए उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर प्रशिक्षण तथा जल एवं स्वच्छता युक्त बालिका हितैषी वातावरण विकसित किया गया है। इससे 350 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। वहीं विज्ञान प्रयोगशाला के माध्यम से 210 विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रेरणा सेंटर : महिला सशक्तिकरण की दिशा में पहल: स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार शहीद वीर नारायण सिंह महिलाओं की सुरक्षा तथा लोगों के रोजगार को विशेष महत्व देते थे। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए महिला सशक्तिकरण एवं नेतृत्व विकास के उद्देश्य से ‘प्रेरणा सेंटर’ की स्थापना की गई है। इस प्रशिक्षण केंद्र में सिलाई, कंप्यूटर एवं रोजगारोन्मुखी कौशल विकास का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। साथ ही महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य तथा स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने के लिए नियमित संवाद आयोजित किए जाते हैं। अब तक 150 से अधिक महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त कर सिलाई व्यवसाय एवं घरेलू सिलाई कार्य प्रारंभ किया है। इनमें से 30 से अधिक महिलाएं प्रतिमाह 8,000 रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।

शहीद वीर नारायण सिंह उद्यान: शहीद वीर नारायण सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उनके नाम पर विकसित उद्यान में उनकी जीवनी एवं गौरवगाथा को प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के साथ-साथ उनके जीवन एवं संघर्ष से भी परिचित हो रहे हैं। प्रति माह तीन हजार से अधिक पर्यटक इस उद्यान का भ्रमण करते हैं। यह उद्यान केवल शहीद वीर नारायण सिंह के जीवन से परिचित नहीं कराता, बल्कि उनके विचारों पर आधारित युवा विकास, विद्यालय विकास, कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, महिला कौशल विकास एवं स्थानीय स्वशासन की प्रेरणा भी देता है। उनके समय में जनता के मनोरंजन एवं सामाजिक सहभागिता के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की भावना को भी इस उद्यान के माध्यम से जीवंत रखने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्राम सेवा केंद्र: शहीद वीर नारायण सिंह के जीवन से यह स्पष्ट होता है कि वे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए साहूकारों और अंग्रेजों से संघर्ष करते थे। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए ग्राम सेवा केंद्र की स्थापना की गई है। यह केंद्र ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ उनके सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक करता है तथा विभिन्न योजनाओं में पंजीयन एवं लाभ दिलाने में सहयोग प्रदान करता है। पिछले दो वर्षों में आसपास के 10 से 15 गांवों के 3,000 से अधिक लोगों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया है। ग्राम सेवा केंद्र के माध्यम से श्रमिक पंजीयन, छात्रवृत्ति, प्रसूति सहायता सहित अनेक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है।
हाट बाजार का विकास: सोनाखान में विकसित हाट बाजार का लाभ केवल स्थानीय नागरिकों को ही नहीं, बल्कि आसपास के 15 से 20 गांवों के व्यापारियों एवं ग्रामीणों को भी मिल रहा है। धूप एवं बारिश से बचाव के लिए विकसित सुविधाओं के कारण यहां नियमित रूप से 30 से 35 दुकानें लगती हैं तथा प्रत्येक बाजार दिवस पर 1,000 से अधिक लोग पहुंचते हैं। शहीद वीर नारायण सिंह की सोच के अनुरूप गांव में स्थानीय अनाज के क्रय-विक्रय की व्यवस्था मजबूत हुई है। बाजार के माध्यम से बाहर का अनाज गांव तक पहुंच रहा है। बाजार से प्राप्त शुल्क का उपयोग ग्राम पंचायत द्वारा सफाई एवं रखरखाव पर किया जा रहा है।

आधारभूत अधोसंरचना का विकास: शहीद वीर नारायण सिंह महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार एवं बच्चों के विकास को महत्व देते थे। इसी भावना के अनुरूप प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल, स्वच्छता, स्मार्ट शिक्षा, बैठने की व्यवस्था एवं शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इससे दो आंगनवाड़ी केंद्र, एक प्राथमिक विद्यालय तथा एक आश्रम शाला के 240 बच्चे लाभान्वित हुए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरणों के साथ-साथ पेयजल, स्वच्छता एवं साफ-सफाई की सुविधाओं का नवीनीकरण किया गया है। सुरक्षा एवं आवागमन को बेहतर बनाने के लिए 36 से अधिक सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई हैं, जिससे खेल मैदान, उद्यान एवं बाजार क्षेत्र में रात्रिकालीन आवागमन सुरक्षित हुआ है।

सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आरओ प्लांट स्थापित किया गया है, जिसका संचालन स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जाता है। इस सुविधा का लाभ स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, बाजार क्षेत्र, स्थानीय परिवारों एवं यात्रियों द्वारा निःशुल्क प्राप्त किया जा रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन 50 से 60 परिवार इसका लाभ उठा रहे हैं। सभी स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, उद्यान एवं स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्वच्छ पेयजल हेतु फिल्टर लगाए गए हैं।
कचरा प्रबंधन: प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति शहीद वीर नारायण सिंह की भावना को ध्यान में रखते हुए गांव में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित की गई है। गांव के प्रत्येक घर से नियमित रूप से कचरे का संग्रहण किया जाता है, जिससे जल स्रोत एवं पर्यावरण सुरक्षित रह सकें। सार्वजनिक कार्यक्रमों, पर्यटकों एवं बाजार आने वाले लोगों की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालय का नियमित संचालन एवं रखरखाव किया जा रहा है, जिससे खुले में शौच की समस्या कम हो रही है। इस सुविधा का प्रतिदिन लगभग 20 से 25 लोग उपयोग कर रहे हैं।

एसबीआई सम्मान एसबीआई फाउंडेशन की एक विशिष्ट सीएसआर पहल है, जिसके अंतर्गत देश के विभिन्न क्षेत्रों के स्वतंत्रता सेनानियों, युद्ध वीरों एवं जननायकों के मूल गांवों का विकास कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जाती है। इसी क्रम में शहीद वीर नारायण सिंह को राष्ट्रीय नायकों में शामिल करते हुए उनके जन्मस्थल सोनाखान में विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। एसबीआई फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से समर्थन सेंटर फॉर डेवलपमेंट सपोर्ट द्वारा इस परियोजना का क्रियान्वयन पंचायत प्रतिनिधियों, सामुदायिक आधारित संगठनों एवं स्थानीय समितियों की सहभागिता से किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य गरीब एवं वंचित समुदायों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरणीय स्थिरता तथा ग्रामीण आधारभूत अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाना है।
यह परियोजना शहीद वीर नारायण सिंह के समाज परिवर्तन एवं कल्याणकारी राज्य के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। आसपास के गांवों के लोग भी आशा के साथ इस पहल को देख रहे हैं और अपेक्षा कर रहे हैं कि भविष्य में उनके गांवों में भी इसी प्रकार के विकास कार्य प्रारंभ होंगे।
