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    आज की बात

    विश्व पर्यावरण दिवस पर सालेभाट में तैयार किए गए 50 हजार सीड बॉल

    vikasBy vikasJune 7, 2026No Comments4 Mins Read2 Views
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    सामुदायिक भागीदारी से हरियाली बढ़ाने की अनूठी पहल

    सालेभाट, कोंडागांव | 5 जून 2026

    आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, वनों की कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब छोटे-छोटे सामुदायिक प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं। कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड अंतर्गत स्थित ग्राम सालेभाट ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया, जहाँ सामूहिक श्रम और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ लगभग 50 हजार सीड बॉल (बीज गोले) तैयार किए गए।

    यह कार्यक्रम एसबीआई ग्राम सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत सेंटर फॉर डेवलपमेंट सपोर्ट (समर्थन) द्वारा, एसबीआई फाउंडेशन एवं एसबीआई कैप सिक्योरिटीज के वित्तीय सहयोग से आयोजित किया गया। इस पहल में ग्राम पंचायत सालेभाट एवं वन संसाधन प्रबंधन समिति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    गाँव बना हरियाली का कार्यशाला केंद्र

    कार्यक्रम का आयोजन शासकीय हाई स्कूल सालेभाट परिसर में किया गया, जहाँ 200 से अधिक ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

    कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने स्थानीय और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों जैसे इमली, करंज, बेर, महुआ, गम्हार और साल के बीजों से लगभग 50 हजार सीड बॉल तैयार किए। मिट्टी, जैविक खाद और देशी बीजों से बनाए गए इन सीड बॉल को सुरक्षित रूप से सुखाने के लिए रखा गया है, जिन्हें आगामी वर्षा ऋतु में बंजर और वनविहीन क्षेत्रों में फैलाया जाएगा।

    “एक बीज, हरियाली की हजार उम्मीदें”

    इस अभियान का मुख्य संदेश था — “एक बीज, हरियाली की हजार उम्मीदें।”

    सीड बॉल तकनीक एक सरल, कम लागत वाली और प्रभावी पद्धति है, जिसके माध्यम से बड़े पैमाने पर पौधरोपण और प्राकृतिक वन पुनर्जीवन को बढ़ावा दिया जा सकता है। वर्षा के दौरान जब ये बीज गोले मिट्टी में घुलते हैं, तब बीजों के अंकुरित होने की संभावना बढ़ जाती है और प्राकृतिक रूप से नए वृक्ष विकसित होते हैं।

    यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहाँ पारंपरिक पौधरोपण करना कठिन या महंगा होता है।

    पर्यावरण संरक्षण पर हुआ संवाद

    कार्यक्रम केवल सीड बॉल निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे पर्यावरण जागरूकता के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी विकसित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों और स्थानीय वक्ताओं ने सीड बॉल तकनीक के महत्व, जैव विविधता संरक्षण, वन क्षेत्र बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की।

    प्रतिभागियों को बताया गया कि यदि स्थानीय समुदाय पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाए, तो जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही, वृक्षारोपण और प्राकृतिक वन पुनर्जीवन से मिट्टी संरक्षण, जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिलती है।

    महिलाओं और युवाओं ने निभाई अग्रणी भूमिका

    इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। महिला स्व-सहायता समूहों ने बड़ी संख्या में सीड बॉल तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, वहीं युवाओं और विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को व्यवहारिक रूप में प्रदर्शित किया।

    सामुदायिक सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि ग्रामीण समाज यदि किसी साझा उद्देश्य के लिए एकजुट हो जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

    वर्षा ऋतु में होगा हरियाली का विस्तार

    कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि तैयार किए गए सीड बॉल को वर्षा ऋतु से पहले और उसके दौरान उपयुक्त स्थानों पर फैलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पौधों का प्राकृतिक रूप से विकास हो सके।

    यह पहल केवल वृक्ष लगाने का अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और हरित भविष्य के निर्माण का एक सामुदायिक संकल्प है।

    सालेभाट से मिला प्रकृति संरक्षण का संदेश

    सालेभाट का यह आयोजन दर्शाता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक आंदोलन है। जब गाँव, पंचायत, महिला समूह, युवा और बच्चे एक साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेते हैं, तब हर बीज एक नए जंगल और हर प्रयास एक बेहतर भविष्य की उम्मीद बन जाता है।

    विश्व पर्यावरण दिवस पर तैयार किए गए ये 50 हजार सीड बॉल केवल मिट्टी और बीज का मिश्रण नहीं हैं, बल्कि उनमें एक हरित, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य के हजारों सपने संजोए हुए हैं।

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