
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के जंपटी गांव की चुंदरी बाई, जो कभी कक्षा 5 में पढ़ाई छोड़ चुकी थीं, आज डिजिटल तकनीक और अपने हुनर से मिसाल बन गई हैं। रिलायंस फाउंडेशन के बीआईजे (भारत इंडिया जोड़ो) कार्यक्रम और समर्थन सेंटर फॉर डेवलपमेंट सपोर्ट के डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण से चुंदरी ने न केवल इंटरनेट चलाना सीखा, बल्कि इसे अपनी आजीविका में भी शामिल किया।
डिजिटल ज्ञान का उपयोग:
चुंदरी बाई ने इंटरनेट पर मुरगियों और बकरियों की देखभाल के लिए समाधान खोजना शुरू किया। जब उनसे पूछा गया कि अगर उनकी मुरगियों को बीमारी हो जाए तो क्या करेंगी, तो उन्होंने सहजता से कहा, “ओटीपी से पूछ लेंगे।” जब उन्हें सही किया गया कि वह “यूट्यूब” का जिक्र कर रही थीं, तो उन्होंने फोन पर बोलकर सवाल किया, “मुरगी में बीमारी के बारे में बताओ।”
बीआईजे कार्यक्रम के अन्य लाभ:
रिलायंस फाउंडेशन के बीआईजे कार्यक्रम के तहत गांव में सिंचाई नहर की मरम्मत की गई, जिससे चुंदरी बाई ने तीसरी फसल उगाई। इस कदम ने उनके तीन बच्चों को महाराष्ट्र पलायन करने से बचा लिया, और उन्होंने गांव में ही सुरक्षित माहौल में काम किया।
प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का उदाहरण:
चार बच्चों की मां और मेहनतकश चुंदरी बाई न केवल डिजिटल साक्षरता का उपयोग कर रही हैं, बल्कि महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन गई हैं। इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सही प्रशिक्षण और संसाधनों के साथ ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
यह कहानी दिखाती है कि कैसे आजीविका, डिजिटल शिक्षा, और सामुदायिक विकास कार्यक्रम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और सामूहिक रूप से ग्रामीण जीवन में सुधार ला सकते हैं।