नई दिल्ली, 23 नवंबर 2024
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (JJM) योजना, जिसका उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल प्रदान करना है, देश में बाल मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से हर साल 1.36 लाख से अधिक बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

प्रमुख बिंदु:
1. बाल मृत्यु दर में कमी:
डायरिया जैसी जलजनित बीमारियां भारत में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की पहुंच से इन बीमारियों में बड़ी गिरावट की संभावना है। इससे न केवल बाल स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि माता-पिता पर मानसिक और आर्थिक बोझ भी कम होगा।
2. स्वास्थ्य और आर्थिक लाभ:
सुरक्षित पानी तक पहुंच से न केवल बीमारियों में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण परिवारों के चिकित्सा खर्च में भी बचत होगी। महिलाओं और बच्चों को पानी लाने में लगने वाले समय की बचत से शिक्षा और अन्य गतिविधियों में उनका समय बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा।
3. रोजगार सृजन:
जल जीवन मिशन के निर्माण और संचालन से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। निर्माण के दौरान रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं, जबकि संचालन और रखरखाव के लिए भी दीर्घकालिक अवसर उपलब्ध होंगे।
4. जल की गुणवत्ता का महत्व:
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। पाइपलाइन से पानी के प्रदूषित होने की संभावना को रोकने के लिए निगरानी और फिल्ट्रेशन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।

5. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का समर्थन:
यह मिशन भारत के सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से स्वच्छ पानी और स्वच्छता (SDG-6), को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों की राय:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के डेवलपमेंट इनोवेशन लैब द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि जल जीवन मिशन न केवल ग्रामीण भारत में जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
निष्कर्ष:
जल जीवन मिशन के जरिए न केवल बाल मृत्यु दर को कम करने में सफलता मिलेगी, बल्कि ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में भी सुधार होगा। इस योजना से जुड़े जागरूकता और निगरानी कार्यक्रमों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि प्रत्येक ग्रामीण घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच सके।
