प्लास्टिक की थैलियों और बर्तनों में गर्म भोजन और पेय पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक; बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले
प्लास्टिक का उपयोग हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है, लेकिन यह हमारी सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। हाल ही में एक 36 वर्षीय व्यक्ति की मौत ने इस खतरे को और उजागर किया है। कैंसर और हार्ट केयर एसोसिएशन के डॉ. ए.के. पांडे के मुताबिक, इस व्यक्ति को जीवन में कभी तंबाकू, शराब या गुटका जैसे नशीले पदार्थों का सेवन नहीं किया था, फिर भी उसे आंतों का कैंसर हो गया।
डॉ. पांडे ने बताया कि मरीज की मृत्यु के बाद उसके शरीर को रिसर्च के लिए दान किया गया, जिससे यह सामने आया कि प्लास्टिक से जुड़े खाने-पीने के सामान का उपयोग इसके पीछे का मुख्य कारण था। मरीज अक्सर प्लास्टिक के कप में चाय पीता था और प्लास्टिक की थैलियों में गर्म खाना लाता था, जिससे प्लास्टिक में मौजूद हानिकारक केमिकल्स उसके शरीर में प्रवेश कर गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक में गर्म खाने या चाय जैसी चीजें लेने से उसमें से हानिकारक केमिकल्स निकलते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं। मरीज के साथ काम करने वाले उसके अन्य साथियों के भी मेडिकल टेस्ट कराए गए, जिसमें कुछ में कैंसर के लक्षण पाए गए।
सरकार की जिम्मेदारी और लोगों की जागरूकता:
हालांकि सरकार प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है और इस दिशा में करोड़ों रुपये खर्च कर जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही है, लेकिन लोग अभी भी प्लास्टिक के उपयोग को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को अपनी आदतों में बदलाव लाने की आवश्यकता है। प्लास्टिक की बॉटल में पानी पीना और प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
डॉ. पांडे की अपील:
डॉ. पांडे ने लोगों से आग्रह किया है कि वे प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें, खासकर गर्म खाने और चाय-कॉफी के लिए। उनका कहना है कि प्लास्टिक के स्थान पर स्टील या अन्य सुरक्षित सामग्री के बर्तनों का उपयोग किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष:
यह घटना हमें जागरूक करती है कि प्लास्टिक का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि हमारे स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है। इसे रोकने के लिए हमें अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा और प्लास्टिक के खतरों के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करना होगा।
