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    You are at:Home»जल मंथन»वाइन फैक्ट्री का पर्यावरणीय संकट: शिवनाथ नदी की दुर्दशा
    जल मंथन

    वाइन फैक्ट्री का पर्यावरणीय संकट: शिवनाथ नदी की दुर्दशा

    vikasBy vikasFebruary 11, 2025Updated:February 14, 2025No Comments2 Mins Read6 Views
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    छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के धूमा गांव में स्थित भाटिया वाइन फैक्ट्री के आसपास एक गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो गया था। फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी और केमिकल्स का नाले के जरिए शिवनाथ नदी में प्रवाह होने से नदी का जलप्रदूषण बढ़ गया था। इससे नदी के इकोसिस्टम में भारी तबाही मच गई थी। लाखों मछलियां मर गईं, और दर्जनों मवेशी भी मौत के शिकार हो गए। इस प्रदूषण ने न केवल नदी की गुणवत्ता को प्रभावित किया, बल्कि आसपास के ग्रामीणों को भी भयंकर परेशानियों में डाल दिया। बदबू और जल प्रदूषण से ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था।

    इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की गई, और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। 23 सितंबर 2024 को कोर्ट ने मामले में दूषित पानी के स्रोत की पहचान करने का आदेश दिया था। इसके बाद 7 फरवरी 2025 को हुई सुनवाई में पर्यावरण संरक्षण मंडल ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया और रिपोर्ट पेश की। जांच टीम ने पाया कि फैक्ट्री में पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हो रहा था, और फैक्ट्री के बाहर गंदगी का ढेर पड़ा था।

    फैक्ट्री के प्रबंधन को चेतावनी दी गई और उसे प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूएशन एक्ट (PCCA) की धारा 33 के तहत पेनाल्टी लगाने की बात कही गई। इसके साथ ही फैक्ट्री से जुड़ी कमियों को दूर करने का निर्देश भी दिया गया।

    हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर, कोर्ट ने फैक्ट्री के प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी और कहा कि वो नियमों के पालन पर पूरी जानकारी प्रस्तुत करें। अगली सुनवाई 7 दिनों बाद तय की गई।

    यह मामला सिर्फ एक फैक्ट्री का नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण का संकट था। हाईकोर्ट की निगरानी में अब जांच और कार्रवाई का दौर जारी है, ताकि शिवनाथ नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके और लोगों की जीवनशैली को बेहतर बनाया जा सके।

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