मुर्धवा गांव, कांकेर जिले की निवासी 50 वर्षीय कमला नेताम, जो पिछले 30 वर्षों से अकेली रहकर अपनी आजीविका के लिए दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं, फ्लोराइड युक्त पानी के कारण फ्लोरोसिस बीमारी का शिकार हो गई थीं। इस समस्या ने उनके स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला।
स्वास्थ्य समस्या और आर्थिक प्रभाव:
2019 में कमला को हाथ-पैरों में दर्द की समस्या शुरू हुई, जो समय के साथ गंभीर होती गई। इस कारण से उनकी मजदूरी बंद हो गई, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। दो साल तक उन्होंने विभिन्न उपचार करवाए, लेकिन कोई राहत नहीं मिली, जिससे उनके स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भारी प्रभाव पड़ा। उनके भाई ने भी मदद की, परंतु उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया।
हस्तक्षेप और समाधान:
2021 में, यूनिसेफ के सहयोग से समर्थन संस्था ने मुर्धवा गांव में फ्लोराइड नियंत्रण के लिए काम शुरू किया। इस प्रयास के तहत शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए फ्लोराइड रिमूवल फिल्टर लगाए गए, भू-जल सुधार और पानी की गुणवत्ता निगरानी की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही, पोषण वाटिका और पंचायतों का क्षमता विकास भी किया गया, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।
स्वास्थ्य में सुधार:
फिल्टर के उपयोग और पोषणयुक्त आहार के सेवन से कमला के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। 2022 तक, शुद्ध पानी और किचन गार्डन से प्राप्त पोषण आहार के कारण उनके स्वास्थ्य में बड़ा अंतर आया। वर्तमान में कमला नेताम स्वस्थ हैं और पहले की तरह मजदूरी करके अपना जीवनयापन कर रही हैं।
निष्कर्ष:
फ्लोराइड रिमूवल फिल्टर और पोषण आहार के माध्यम से कमला के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। यह पहल फ्लोरोसिस जैसी समस्याओं से प्रभावित अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकती है।